एम्स भोपाल में स्तन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञ बोले- समय पर जांच से बचाई जा सकती हैं हजारों जिंदगियां

भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी विभाग की ओर से स्तन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन द डियर फाउंडेशन (स्विट्जरलैंड) के सहयोग से किया गया, जिसमें 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जांच, सही इलाज और जागरूकता से स्तन कैंसर से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर ने कहा कि हर महिला को अपने स्तनों में होने वाले सामान्य बदलावों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि किसी भी असामान्यता की समय रहते पहचान की जा सके। उन्होंने सामान्य जोखिम वाली 40 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को नियमित स्क्रीनिंग मैमोग्राफी कराने की सलाह दी।

कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. आकांक्षा चौधरी ने बताया कि बढ़ती उम्र, तंबाकू और शराब का सेवन तथा मोटापा कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है और डर या सामाजिक झिझक के कारण कई महिलाएं समय पर जांच नहीं करातीं।

विशेषज्ञों ने महिलाओं को स्वयं स्तन परीक्षण (Breast Self-Examination) की सही विधि अपनाने, किसी भी असामान्य बदलाव पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने और अप्रमाणित वैकल्पिक उपचारों से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित उपचार से स्तन कैंसर का सफल इलाज संभव है।

कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, महिलाओं के स्वास्थ्य, कैंसर की रोकथाम और समय पर पहचान के महत्व पर जानकारी दी। द डियर फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने “डियर ऐप” के माध्यम से स्तन स्वास्थ्य जागरूकता और प्रारंभिक पहचान की तकनीक भी प्रदर्शित की।

विशेषज्ञों ने कहा कि जागरूकता, नियमित जांच और समय पर वैज्ञानिक उपचार ही स्तन कैंसर के बढ़ते बोझ को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

Exit mobile version