भोपाल। भोपाल नगर निगम द्वारा आवासीय क्षेत्रों में संचालित अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ 10 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद कार्रवाई का दावा किया गया था, लेकिन गुरुवार को अधिकांश प्रतिष्ठान सामान्य रूप से खुले रहने का आरोप लगाया गया। इसे लेकर रहवासियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति का कहना है कि अरेरा कॉलोनी सहित कई आवासीय क्षेत्रों में वर्षों से अवैध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। समिति के अनुसार, नगर निगम ने करीब 1,000 संस्थानों को नोटिस जारी कर सीलिंग कार्रवाई की घोषणा की थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अधिकांश बड़े प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई नहीं हुई।
रहवासियों ने बताया कि इस मामले को लेकर क्षेत्र के निवासी पूर्णेंदु शुक्ला सहित अन्य लोगों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिस पर न्यायालय ने जिला प्रशासन और नगर निगम से जवाब मांगा है।
समिति से जुड़े विवेक त्रिपाठी ने कहा कि यदि नगर निगम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई नहीं करता है तो सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की जाएगी। उनका आरोप है कि कई आवासीय भूखंडों पर नियमों के विपरीत व्यावसायिक निर्माण और संचालन हो रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रहवासियों का यह भी आरोप है कि नगर निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित है और प्रभावशाली लोगों के प्रतिष्ठानों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। उनका कहना है कि कई इमारतों का संचालन भवन पूर्णता प्रमाण-पत्र (Completion Certificate) के बिना किया जा रहा है तथा स्वीकृत नक्शों का भी उल्लंघन हुआ है।
नगर निगम की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस बयान के साथ उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसलिए रहवासियों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि नगर निगम या प्रशासन का पक्ष सामने आता है तो उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
