भोपाल के वरुण मोहन बने सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, शहर का बढ़ाया गौरव

भोपाल/नई दिल्ली। राजधानी भोपाल के निवासी और जवाहरलाल नेहरू स्कूल (भेल) के पूर्व छात्र वरुण मोहन ने न्यायिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्हें अप्रैल 2026 में भारत का सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। सुप्रीम कोर्ट में किसी पक्षकार की ओर से याचिका या अन्य वाद दायर करने का अधिकार केवल एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड को ही होता है।

शिक्षा और पेशेवर सफर

वरुण मोहन ने वर्ष 2009 में भोपाल स्थित जवाहरलाल नेहरू स्कूल (भेल) से स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने 2009 से 2014 के बीच नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ओडिशा से विधि की पढ़ाई की। 22 जुलाई 2014 को उन्होंने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया।

करियर की शुरुआत में उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीधर वाई. चितले के साथ लॉ क्लर्क के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता और वर्तमान में पुरुषेंद्र कौरव के साथ जूनियर अधिवक्ता के रूप में कार्य कर महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किया।

2019 से स्वतंत्र वकालत

वर्ष 2019 से वरुण मोहन दिल्ली उच्च न्यायालय में स्वतंत्र रूप से वकालत कर रहे हैं। उनकी विशेषज्ञता उच्च न्यायालय के मामलों के साथ-साथ आर्बिट्रेशन (Arbitration) और मध्यस्थता (Mediation) से जुड़े मामलों में है। अब एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बनने के बाद वे सर्वोच्च न्यायालय में भी स्वतंत्र रूप से वाद प्रस्तुत कर सकेंगे।

सफलता का मंत्र

अपनी उपलब्धि पर वरुण मोहन ने कहा कि उन्हें कड़ी मेहनत और निरंतरता पर पूरा विश्वास है। उनके अनुसार, इन्हीं दो गुणों के बल पर जीवन में किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों, मित्रों और भोपाल के कानूनी एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

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