भोपाल, 10 अगस्त 2026। मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि भोपाल-विदिशा मार्ग को 4-लेन करने की परियोजना को मंत्रि-परिषद की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। करीब ₹1,757 करोड़ 55 लाख की लागत से 44.83 किलोमीटर लंबे मौजूदा 2-लेन मार्ग को पेव्ड शोल्डर के साथ 4-लेन में बदला जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के विकास के साथ आधुनिक सड़क नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहरों, कस्बों, औद्योगिक क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन केंद्रों के बीच तेज और सुरक्षित कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
भोपाल-विदिशा फोरलेन में बनेंगे तीन बायपास
भोपाल-विदिशा परियोजना में कुल 8.25 किलोमीटर के तीन बायपास प्रस्तावित हैं।
– सूखी सेवनिया बायपास: 1.80 किमी
– बेरखेड़ी बायपास: 1.35 किमी
– सलामतपुर बायपास: 5.10 किमी
इन बायपास से आबादी वाले क्षेत्रों में भारी यातायात का दबाव कम होने और सड़क सुरक्षा बेहतर होने की उम्मीद है।
यह मार्ग भोपाल के अयोध्या बायपास स्थित भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर सूखी सेवनिया, दीवानगंज और सलामतपुर होते हुए एनएच-146 के सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाता है। यह भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मार्ग है।
10,975 PCU से ज्यादा है वर्तमान यातायात
सरकार के अनुसार इस मार्ग पर वर्तमान यातायात लगभग 10,975 पैसेंजर कार यूनिट (PCU) है, जो 4-लेन मार्ग के लिए निर्धारित 10 हजार PCU के मानक से अधिक है। भविष्य में यातायात बढ़ने और मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए सड़क को 4-लेन करना जरूरी माना गया है।
सांची और विदिशा के पर्यटन को मिलेगा फायदा
भोपाल-विदिशा मार्ग केवल यातायात के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में सांची स्तूप, संग्रहालय, अशोक स्तंभ और उदयगिरि की गुफाएं जैसे प्रमुख ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल हैं।
सरकार का कहना है कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से भोपाल से विदिशा और सांची की यात्रा आसान होगी। इससे पर्यटन के साथ होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है।
भोपाल-इंदौर और उज्जैन के बीच भी मजबूत होगा नेटवर्क
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र भविष्य में निवेश, उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के प्रमुख केंद्र बनेंगे।
उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान, इंदौर की औद्योगिक-व्यावसायिक क्षमता और भोपाल की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भूमिका को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।
उज्जैन-इंदौर क्षेत्र में इंदौर-उज्जैन 6-लेन, इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड 4-लेन, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड 4-लेन, उज्जैन-मक्सी 4-लेन, उज्जैन सिंहस्थ बायपास और हरिफाटक ब्रिज चौड़ीकरण जैसी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इंदौर-उज्जैन 6-लेन परियोजना में करीब 80 प्रतिशत भौतिक प्रगति बताई गई है।
भोपाल में वेस्टर्न और ईस्टर्न बायपास पर जोर
भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के लिए भोपाल वेस्टर्न बायपास, भोपाल ईस्टर्न बायपास और भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
सरकार के अनुसार भोपाल वेस्टर्न बायपास को स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि ईस्टर्न बायपास की स्वीकृति प्रक्रिया में है। इन परियोजनाओं से शहर के भीतर भारी और लंबी दूरी के वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
ढाई साल में 29,693 किमी सड़कों का निर्माण और उन्नयन
मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 29,693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और उन्नयन पूरा किया गया है।
इसके अलावा हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत ₹18,166 करोड़ की लागत से 444 किलोमीटर लंबी 7 प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर काम जारी है।
वहीं, ₹26,890 करोड़ की लागत वाली 626 किलोमीटर लंबी 9 परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रक्रियाधीन हैं। भविष्य की परियोजनाओं के लिए 1,734 किलोमीटर लंबी 41 परियोजनाओं की डीपीआर भी तैयार की जा रही है।
794 किमी के तीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की डीपीआर
मध्य प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क विकसित करने के लिए पहले चरण में 794 किलोमीटर लंबे तीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की डीपीआर तैयार की जा रही है। इनकी अनुमानित लागत ₹38,456 करोड़ बताई गई है।
प्रमुख परियोजनाएं हैं:
– सागर-सतना एक्सप्रेस-वे
– भोपाल-मंदसौर एक्सप्रेस-वे
– जबलपुर-आशापुर एक्सप्रेस-वे
दूसरे चरण में करीब 926 किलोमीटर लंबे चार अन्य ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित हैं, जिनमें सागर-जबलपुर, कटनी-सिंगरौली, भोपाल-जबलपुर और भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेस-वे शामिल हैं।
2031 तक ₹88,634 करोड़ से विकसित होंगी 29,682 किमी सड़कें
सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के रोड नेटवर्क मास्टर प्लान में 1,226 मार्गों की कुल 29,682 किलोमीटर लंबाई के विकास और उन्नयन का लक्ष्य रखा है। इन कार्यों पर अनुमानित ₹88,634 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री के अनुसार पीएम गतिशक्ति पोर्टल और जीआईएस आधारित योजना के जरिए सड़क नेटवर्क की जरूरत, कनेक्टिविटी गैप और संभावित विकास क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि आधुनिक सड़क और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क से मध्य प्रदेश में निवेश, उद्योग, पर्यटन, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
