मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर में न्यूरोसाइंसेज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू, इमरजेंसी मरीजों के लिए फ्री एंबुलेंस सेवा भी लॉन्च

कोलकाता, 10 अगस्त 2026। मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर ने न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज को और बेहतर बनाने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर न्यूरोसाइंसेज की शुरुआत की है। सोमवार को आयोजित न्यूरोसाइंसेज कॉन्क्लेव में इस सेंटर का आधिकारिक शुभारंभ किया गया। इस दौरान न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरोइंटरवेंशन, स्पाइन सर्जरी और न्यूरो रिहैबिलिटेशन से जुड़े विशेषज्ञों ने आधुनिक न्यूरोलॉजिकल केयर पर चर्चा की।

अस्पताल के अनुसार, नए सेंटर में मरीजों को कई विशेषज्ञों की संयुक्त देखरेख में जांच और इलाज की सुविधा देने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए जांच से लेकर सर्जरी और रिहैबिलिटेशन तक एकीकृत इलाज उपलब्ध कराना है।

स्ट्रोक समेत गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों पर फोकस

न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में स्ट्रोक, मिर्गी, न्यूरोवैस्कुलर बीमारी, मूवमेंट डिसऑर्डर और न्यूरोसर्जिकल स्थितियां शामिल हैं। इनमें कई मामलों में समय पर बीमारी की पहचान और उपचार मरीज के परिणामों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

WHO की 2025 की ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन न्यूरोलॉजी का हवाला देते हुए अस्पताल ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां दुनियाभर में बीमारी और विकलांगता का बड़ा कारण हैं। भारत में भी स्ट्रोक एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है।

एक ही सेंटर में कई विशेषज्ञ सेवाएं

मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर न्यूरोसाइंसेज में कई विशेषज्ञ सेवाओं को एक साथ जोड़ा गया है। इनमें शामिल हैं—

– न्यूरोलॉजी
– फंक्शनल न्यूरोसर्जरी
– न्यूरोसर्जरी
– न्यूरोइंटरवेंशन और एंडोवैस्कुलर सर्जरी
– स्पाइन सर्जरी
– न्यूरो रिहैबिलिटेशन
– न्यूरो फिजियोथेरेपी
– न्यूरो साइकोलॉजी
– न्यूरो एनेस्थीसिया

अस्पताल का कहना है कि इन सेवाओं को एक साथ लाने से जटिल मामलों में अलग-अलग विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय के साथ इलाज की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

इमरजेंसी मरीजों के लिए फ्री एंबुलेंस सेवा

न्यूरोसाइंसेज सेंटर के लॉन्च के साथ मणिपाल हॉस्पिटल्स ईस्ट ने पात्र इमरजेंसी मरीजों के लिए फ्री इमरजेंसी पिकअप सर्विस की भी घोषणा की है।

यह सुविधा कोलकाता में मणिपाल हॉस्पिटल्स से करीब 12 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र मरीजों के लिए उपलब्ध होगी। सेवा की उपलब्धता और निर्धारित नियमों के अनुसार मरीजों को नजदीकी मणिपाल हॉस्पिटल के इमरजेंसी विभाग तक मुफ्त एंबुलेंस सुविधा दी जाएगी।

यह सेवा खास तौर पर स्ट्रोक, हार्ट अटैक, सड़क दुर्घटना, गंभीर सांस संबंधी समस्या, बेहोशी और अन्य अचानक होने वाली मेडिकल इमरजेंसी में मददगार हो सकती है।

अस्पताल के मुताबिक, यह सेवा 24 घंटे टेक्नोलॉजी आधारित कमांड सेंटर, GPS से लैस एंबुलेंस, प्रशिक्षित इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम और आधुनिक मेडिकल सुविधाओं से लैस वाहनों के जरिए संचालित होगी। मरीज WhatsApp के जरिए QR कोड से अपनी लोकेशन भी साझा कर सकेंगे।

न्यूरोइंटरवेंशन में बाइप्लेन कैथ लैब की भूमिका

मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर के डायरेक्टर-न्यूरोइंटरवेंशन एंड एंडोवैस्कुलर सर्जरी डॉ. सुकल्याण पुरकायस्थ ने बताया कि न्यूरोइंटरवेंशनल तकनीक से कई जटिल सेरेब्रोवैस्कुलर बीमारियों का मिनिमली इनवेसिव तरीके से इलाज किया जा सकता है।

उन्होंने अस्पताल में मौजूद बाइप्लेन कैथ लैब को महत्वपूर्ण सुविधा बताया। उनके अनुसार, इसमें अलग-अलग कोणों से रियल-टाइम इमेजिंग की सुविधा मिलती है, जो एक्यूट स्ट्रोक, सेरेब्रल एन्यूरिज्म और वैस्कुलर मालफॉर्मेशन जैसी स्थितियों में उपचार के दौरान मददगार हो सकती है।

स्पाइन सर्जरी में मिनिमली इनवेसिव तकनीक पर जोर

सीनियर कंसल्टेंट और क्लिनिकल लीड-स्पाइन सर्जरी डॉ. अनिंद्य बसु ने कहा कि स्पाइन सर्जरी में मिनिमली इनवेसिव तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उपयुक्त मरीजों में इन तकनीकों से कम ऊतक क्षति, कम ब्लड लॉस, ऑपरेशन के बाद कम दर्द और जल्दी रिकवरी में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि सेंटर में जटिल स्पाइन मामलों का विभिन्न विशेषज्ञों की टीम द्वारा मूल्यांकन किया जा सकेगा।

पार्किंसंस और मूवमेंट डिसऑर्डर के लिए DBS क्लिनिक

डायरेक्टर एवं सीनियर कंसल्टेंट-न्यूरोसर्जरी डॉ. मिलिंद देवगांवकर ने बताया कि आधुनिक न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीकों, खासकर डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) ने मूवमेंट डिसऑर्डर के इलाज में नई संभावनाएं पैदा की हैं।

अस्पताल में DBS क्लिनिक के जरिए पार्किंसंस डिजीज और अन्य मूवमेंट डिसऑर्डर वाले उपयुक्त मरीजों का मूल्यांकन और इलाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मरीज का सही चयन, सर्जिकल प्लानिंग और लंबे समय तक फॉलो-अप महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों की टीम के साथ इलाज पर जोर

डायरेक्टर एवं हेड-न्यूरोलॉजी डॉ. जयंत रॉय ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल बीमारी हर मरीज में अलग तरह से सामने आ सकती है। इसलिए व्यक्तिगत और समय पर इलाज जरूरी है। उन्होंने स्ट्रोक को ऐसी न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी बताया, जिसमें बीमारी की जल्दी पहचान और उपचार महत्वपूर्ण है।

क्लिनिकल लीड एवं सीनियर कंसल्टेंट-न्यूरोसर्जरी डॉ. दीपेंद्र कुमार प्रधान ने कहा कि आधुनिक न्यूरोसर्जरी केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। इसमें इमेजिंग, तकनीक और अलग-अलग विशेषज्ञों के बीच समन्वय की भी अहम भूमिका है।

हर दिन करीब 500 स्ट्रोक मामलों का दावा

मणिपाल हॉस्पिटल्स ईस्ट के रीजनल डायरेक्टर डॉ. अयानाभ देबगुप्ता ने कहा कि भारत में हर दिन करीब 500 स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं। ऐसे में बीमारी की जल्दी पहचान, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और विशेषज्ञ उपचार तक जल्द पहुंच जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मणिपाल हॉस्पिटल्स के अस्पताल स्ट्रोक के इलाज के लिए तैयार हैं और विशेषज्ञों की टीम के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। मणिपाल एडवांस्ड रोडसाइड इमरजेंसी सर्विसेज (MARS) और नई फ्री इमरजेंसी पिकअप सेवा के जरिए अस्पताल इमरजेंसी केयर सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

इमरजेंसी से रिहैबिलिटेशन तक एकीकृत देखभाल

मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर के नए सेंटर का उद्देश्य मरीजों को इमरजेंसी रिस्पॉन्स और आधुनिक जांच से लेकर विशेषज्ञ उपचार, सर्जरी, रिहैबिलिटेशन और फॉलो-अप तक एक समन्वित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है। अस्पताल का कहना है कि इन पहलों से कोलकाता में न्यूरोलॉजिकल और अन्य मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने और इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है।

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