अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले एम्स भोपाल की पहल, बच्चों को योग, ध्यान और रचनात्मक गतिविधियों से दिया स्वस्थ जीवन का संदेश

भोपाल। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ समाज में समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कार्यरत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में बच्चों के लिए विशेष योग एवं वेलनेस कार्यशाला का आयोजन किया। इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को योग, ध्यान, सकारात्मक सोच और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना था।
एम्स भोपाल के आयुष ब्लॉक में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थान के संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और स्टाफ के बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। लगभग ढाई घंटे तक चले इस कार्यक्रम में योगाभ्यास, ध्यान, कहानी-वाचन, चित्रकला और समूह गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन का महत्व समझाया गया।
योग और वेलनेस के माध्यम से समग्र विकास पर जोर
कार्यशाला का आयोजन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व फिजियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वरुण मल्होत्रा ने किया।
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “योग फॉर वेलनेस, विजडम एंड वर्ल्ड पीस” और “योग फॉर हेल्दी एजिंग” के अनुरूप बच्चों को योग को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन का माध्यम भी बताया गया।
बच्चों के बीच पहुंचे उप निदेशक प्रशासन
कार्यक्रम में एम्स भोपाल के उप निदेशक (प्रशासन) संदेश कुमार जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों से संवाद कर उनके अनुभव सुने और योग के माध्यम से अनुशासित एवं स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों और कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि स्वस्थ आदतों का विकास बचपन से ही होना चाहिए, जिससे भविष्य में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
आयुष विभाग और विशेषज्ञों का रहा विशेष योगदान
कार्यक्रम के सफल संचालन में एम्स भोपाल के आयुष विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. दानिश जावेद ने आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया, जबकि योग प्रशिक्षक विजयता जैन ने बच्चों को विभिन्न योगाभ्यासों और स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया।
फिजियोलॉजी विभाग की प्रभारी एवं विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि सिंह ने कार्यक्रम के समन्वय और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
योगदा सत्संग सोसाइटी की शिक्षाओं पर आधारित रहा आयोजन
कार्यशाला का आयोजन योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया की शिक्षाओं और मूल्यों के अनुरूप किया गया। कार्यक्रम की मुख्य प्रशिक्षक निधि ठक्कर रहीं, जिन्होंने बच्चों को ध्यान, सकारात्मक सोच, आत्म-अनुशासन और भारतीय संस्कृति के मूल्यों से परिचित कराया।
कार्यक्रम में वाईएसएस के स्वयंसेवकों डीएसआर पटेल, ईशा और साक्षी ने भी सक्रिय सहयोग दिया।
योग, खेल और कला के माध्यम से सीख
कार्यशाला के दौरान बच्चों ने योग आधारित ऊर्जा-वर्धक अभ्यासों के साथ ध्यान सत्र में भाग लिया। कहानी-वाचन और समूह चर्चा के माध्यम से नैतिक मूल्यों और सकारात्मक सोच पर संवाद किया गया।
विशेष आकर्षण “पेंट योर डे” गतिविधि रही, जिसमें बच्चों ने अपनी कल्पनाओं, अनुभवों और भावनाओं को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। इस गतिविधि ने बच्चों की रचनात्मकता और आत्म-अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में बच्चों और उनके अभिभावकों ने संयुक्त ध्यान सत्र में भाग लिया। इस पहल का उद्देश्य परिवार और स्वास्थ्य के बीच संबंध को मजबूत बनाना तथा योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश देना था।
बेहतर एकाग्रता और आत्मविश्वास का अनुभव
आयोजकों के अनुसार ध्यान और योगाभ्यास के बाद बच्चों में बेहतर एकाग्रता, समूह गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता और कला गतिविधियों में रचनात्मक अभिव्यक्ति देखने को मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि योग और ध्यान बच्चों के मानसिक विकास और व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
चिकित्सा सेवाओं से आगे बढ़कर समग्र स्वास्थ्य की दिशा में प्रयास
एम्स भोपाल की यह पहल दर्शाती है कि संस्थान केवल रोग उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों, उनके परिवारों और नई पीढ़ी के समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश था— “योग मैट पर छोटे कदम, जीवन में बड़े परिवर्तन।” यह संदेश बच्चों और अभिभावकों दोनों को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।





