माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में ‘अभ्युदय-2026’ के दूसरे दिन पूर्व विद्यार्थियों ने नवागतों को दिए सफलता के मंत्र
भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन कार्यक्रम ‘अभ्युदय-2026’ के दूसरे दिन देश-विदेश में कार्यरत विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों ने नए विद्यार्थियों से संवाद किया और अपने अनुभव साझा किए।
सिनेमा और वेबसीरीज ‘गुल्लक’ के लेखक दुर्गेश सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी भाषा, जड़, जमीन और पृष्ठभूमि पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें आज जो भी काम मिल रहा है, उसके पीछे उनकी भाषा और पृष्ठभूमि की बड़ी भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों को एआई के उपयोग की सलाह देते हुए कहा कि एआई आपको रिप्लेस करने नहीं आया है, बल्कि यह एक टूल है। इसका सही उपयोग सीखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय धार्मिक और पारंपरिक कहानियों पर आज खूब सिनेमा बन रहा है। दादी-नानी से सुनी कहानियां भी रचनात्मकता का महत्वपूर्ण आधार बन सकती हैं।
पत्रकारिता में मूल्यों और स्वास्थ्य का महत्व
टीवी पत्रकार और एंकर रवि मिश्रा ने कहा कि पत्रकारिता में संसाधनों की अपनी भूमिका है, लेकिन मूल्यों का महत्व सबसे अधिक है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान नौकरी की चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्हें पढ़ने, सीखने, कैंपस लाइफ का आनंद लेने और अपनी गलतियों से सीखने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में सबसे बड़ा साथी स्वास्थ्य है, इसलिए विद्यार्थियों को अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। तकनीक के क्षेत्र में कार्यरत पूर्व विद्यार्थी अजीत कुमार ने विद्यार्थियों को लगातार सीखते रहने की सलाह दी।
पढ़ाई के साथ स्किल्स पर दें ध्यान
डिजिटल पत्रकार प्रसून मिश्रा ने विद्यार्थियों को तीन महत्वपूर्ण बातें बताईं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को फील्ड की जरूरतों को समझना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे क्या करना चाहते हैं। इसके साथ ही अपने विषय की गहरी समझ विकसित करने और लेखन, बोलने, कैमरा संचालन, वीडियो एडिटिंग व लेआउट डिजाइन जैसी स्किल्स सीखने पर ध्यान देना चाहिए।
बिजनेस पत्रकारिता से जुड़ी मीनाक्षी शर्मा ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया, बल्कि जीवन और करियर की दिशा भी दिखाई। राजनीतिक संचार से जुड़े पंकज झा ने विद्यार्थियों से कहा कि पत्रकारिता में आगे बढ़ने के लिए पढ़ने का कोई विकल्प नहीं है।
पूर्व विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव
विश्वविद्यालय के पहले बैच (1991) के विद्यार्थी संजय सलिल ने ऑनलाइन जुड़कर कहा कि सीमित संसाधनों से शुरू हुआ विश्वविद्यालय आज बड़े परिसर तक पहुंच चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों से लगातार आगे बढ़ते रहने का आह्वान किया।
प्राग से ऑनलाइन जुड़ी पूर्व विद्यार्थी नीति सुधा ने मनोरंजन पत्रकारिता के अनुभव साझा किए। फिल्म मेकिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग से जुड़े नील रुद्रजीत मुखर्जी ने एआई का सही तरीके से उपयोग करने की सलाह दी।
सुधांशु शेखर ने एडवरटाइजमेंट, क्रिएटिव हेड और फिल्म मेकिंग के क्षेत्र में अवसरों की जानकारी दी। मिताली उपाध्याय ने कम्युनिकेशन को आज के दौर की महत्वपूर्ण स्किल बताया। ललित कुमार ने विद्यार्थियों से एआई को बैसाखी नहीं बनाने और विदेशी भाषाएं सीखने का प्रयास करने को कहा।
विज्ञापन क्षेत्र से जुड़े सुशील अग्रवाल ने विश्वविद्यालय में किए गए अपने डिप्लोमा कोर्स को अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संघर्ष करने की क्षमता और लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने से सफलता जरूर मिलती है।
लोकलाइजेशन इंडस्ट्री से जुड़ी शिखा शर्मा, बिजनेस पत्रकार अपर्णा झा और वरिष्ठ पत्रकार आनंद पांडेय ने भी विद्यार्थियों को करियर संबंधी सुझाव दिए। आनंद पांडेय ने व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर ऑथेंटिसिटी और इंटीग्रिटी बनाए रखने को जरूरी बताया।
वरिष्ठ पत्रकार दीपक पगारे ने विश्वविद्यालय से मिले व्यवहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान को अपने जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। डिजिटल मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार सुमित पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय में सीखने की प्रक्रिया ही विद्यार्थियों को बेहतर पत्रकार बनाएगी। उन्होंने सिंहस्थ कवरेज के अनुभव भी साझा किए और कहा कि अच्छा पत्रकार वही है जो पाठकों को केंद्र में रखकर समाचार तैयार करता है।
इसके अलावा अमेरिका, दुबई, प्राग और मिस्र से विश्वविद्यालय के कई पूर्व विद्यार्थी ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़े और नवागत विद्यार्थियों को अपने अनुभव व संदेश दिए।
मेधावी विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में वर्ष 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रावीण्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
