भोपाल, 3 सितंबर 2026। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भोपाल की ओर से 12 सितंबर 2026 को वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत आयोजित की जाएगी। जिला न्यायालय भोपाल और तहसील न्यायालय बैरसिया सहित कुटुंब न्यायालय, श्रम न्यायालय और रेरा में लोक अदालत के माध्यम से लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सहमति से निराकरण किया जाएगा।
लोक अदालत के लिए जिले में करीब 62 खंडपीठों का गठन किया जा रहा है। इनमें 10,757 लंबित राजीनामा योग्य मामलों के साथ 80,500 प्री-लिटिगेशन प्रकरण भी रखे गए हैं। इस तरह कुल 91,257 मामलों के निराकरण का लक्ष्य है।
चेक बाउंस से लेकर पारिवारिक विवाद तक होंगे शामिल
लोक अदालत में आपराधिक शमनीय प्रकरण, धारा 138 पराक्रम्य लिखित अधिनियम के तहत चेक बाउंस मामले, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, विद्युत अधिनियम से जुड़े मामले, पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद और विभिन्न सिविल मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निराकरण किया जाएगा।
प्री-लिटिगेशन मामलों में मुख्य रूप से विद्युत विभाग के बकाये, बैंक रिकवरी, जलकर, बीएसएनएल बकाया और यातायात ई-चालान से संबंधित मामले शामिल हैं।
बिजली और नगर निगम के मामलों में मिलेगी विशेष छूट
इस बार लोक अदालत में विद्युत विभाग और नगर निगम की ओर से मामलों के निराकरण पर विशेष छूट और रियायत का लाभ दिया जाएगा। इससे बकाया राशि से संबंधित मामलों में नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
समझौते के बाद फैसला अंतिम और बाध्यकारी
लोक अदालत में पक्षकार अपनी सहमति से विवाद का निपटारा कर सकते हैं। आपसी समझौते के आधार पर पारित लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है और संबंधित पक्षकारों पर बाध्यकारी रहता है। लोक अदालत के माध्यम से प्रकरण का निराकरण होने पर नियमानुसार कोर्ट फीस की वापसी का भी प्रावधान है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार लोक अदालत के जरिए विवाद समाप्त होने से पक्षकारों का समय और धन दोनों बचते हैं।
7 सितंबर को होगी न्यायाधीशों की बैठक
नेशनल लोक अदालत की तैयारियों को लेकर 7 सितंबर को जिला न्यायालय में सभी न्यायाधीशों की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में लोक अदालत में रखे जाने वाले प्रकरणों और उनके निराकरण की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
31 जुलाई तक 1.64 लाख से अधिक मामले लंबित
प्राधिकरण से उपलब्ध जानकारी के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक जिला न्यायालय, कुटुंब न्यायालय और सिविल न्यायालय बैरसिया में कुल 1,64,268 प्रकरण लंबित थे। इनमें 23,624 सिविल और 1,31,901 आपराधिक मामले शामिल हैं।
वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की 3 सितंबर को जारी जानकारी में विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या 1,64,821 बताई गई है। लोक अदालत के लिए इनमें से राजीनामा योग्य मामलों को अलग से चिह्नित किया गया है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुनीत अग्रवाल ने नागरिकों से लोक अदालत का लाभ लेने की अपील की है। लोक अदालत से संबंधित जानकारी और सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भोपाल एवं तहसील विधिक सेवा समिति बैरसिया से संपर्क किया जा सकता है।
