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55% ऑक्सीजन स्तर वाले 12 दिन के नवजात का एम्स भोपाल में सफल उपचार, मध्य भारत में पहली बार RVOT स्टेंटिंग

भोपाल। एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे 12 दिन के नवजात का सफल उपचार कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केवल 2.1 किलोग्राम वजन वाले इस बच्चे का ऑक्सीजन स्तर इलाज से पहले घटकर 55 प्रतिशत रह गया था। चिकित्सकों ने मध्य भारत में पहली बार नवजात में RVOT स्टेंटिंग की, जिसके बाद बच्चे की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।

बच्चे को जन्म से डबल आउटलेट राइट वेंट्रिकल (DORV) नामक जटिल हृदय रोग था। इसके कारण हृदय से फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाला मार्ग काफी संकरा था और फेफड़ों का विकास भी अपेक्षाकृत कम था। जन्म के समय ऑक्सीजन स्तर 85-90 प्रतिशत था, लेकिन 12वें दिन यह घटकर 55 प्रतिशत रह गया। हालत बिगड़ने पर बच्चे को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

बिना बड़ी सर्जरी बढ़ाया फेफड़ों में रक्त प्रवाह

गंभीर स्थिति को देखते हुए एम्स भोपाल की इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी टीम ने RVOT स्टेंटिंग का निर्णय लिया। प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. भूषण शाह और डॉ. सुदेश प्रजापति ने किया। एनेस्थीसिया और नवजात शिशु चिकित्सा टीम का नेतृत्व डॉ. वैशाली वैंदेसकर और डॉ. चेतन खरे ने किया।

RVOT स्टेंटिंग में फेफड़ों तक जाने वाले संकरे रास्ते में छोटा स्टेंट लगाया जाता है, जिससे रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। प्रक्रिया के दौरान ही बच्चे का ऑक्सीजन स्तर बढ़कर करीब 88 प्रतिशत हो गया। अगले दिन बच्चे को वेंटिलेटर से सफलतापूर्वक हटा दिया गया। फिलहाल बच्चा चिकित्सकीय रूप से स्थिर है और उसका वजन भी बढ़ रहा है।

अंतिम सर्जरी तक मदद करेगा स्टेंट

डॉ. भूषण शाह ने बताया कि कम वजन और गंभीर स्थिति के कारण तत्काल बड़ी सर्जरी करना जोखिमपूर्ण था। RVOT स्टेंटिंग से फेफड़ों में रक्त प्रवाह बढ़ाकर बच्चे को स्थिर होने और वजन बढ़ाने का समय मिलेगा।

चिकित्सकों के अनुसार यह स्टेंट अंतिम उपचार नहीं है, बल्कि अंतिम सर्जरी तक एक अस्थायी व्यवस्था है। बच्चे की नियमित हृदय जांच और इकोकार्डियोग्राफी की जाएगी। उसकी वृद्धि और स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए करीब छह माह की उम्र में अंतिम सर्जरी की योजना बनाई जाएगी।

पहले बच्चे को खो चुके थे माता-पिता

इस उपचार से परिवार को भावनात्मक राहत भी मिली है। बच्चे के माता-पिता पहले अपने एक बच्चे को करीब दो सप्ताह की उम्र में गंभीर हृदय रोग के कारण खो चुके हैं। ऐसे में नवजात का ऑक्सीजन स्तर 55 प्रतिशत तक गिरने से परिवार बेहद चिंतित था।

माता-पिता ने चिकित्सकों का आभार जताते हुए कहा कि प्रक्रिया के बाद बच्चे के ऑक्सीजन स्तर में सुधार और अगले दिन वेंटिलेटर से बाहर आने से उन्हें नई उम्मीद मिली। एम्स भोपाल की टीम ने इस जटिल मामले में समय पर हस्तक्षेप कर नवजात को गंभीर स्थिति से बाहर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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