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3435 जर्जर भवन, कार्रवाई के नाम पर नोटिस का सिलसिला

बारिश से पहले हर साल होता है सर्वे, फिर भी नहीं खाली होते खतरनाक मकान; पिछले साल जर्जर सरकारी आवास गिरने से युवक की मौत, अब भी हजारों लोग खतरे में

भोपाल। राजधानी में बारिश का दौर जारी है और इसी के साथ जर्जर भवनों का खतरा भी बढ़ गया है। नगर निगम के जून 2026 के सर्वे में शहर में 3435 जर्जर, अति-जर्जर और खतरनाक भवन चिन्हित किए गए हैं। इनमें 2464 सरकारी और 971 निजी भवन शामिल हैं। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार इनमें 740 सरकारी भवन अति-जर्जर स्थिति में हैं। इसके बावजूद अब तक केवल 35 भवन हटाए गए और पांच मकान खाली कराए जा सके हैं। 25 जर्जर इमारतों की मरम्मत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम को भवनों की खतरनाक स्थिति पहले से पता है तो बारिश शुरू होने के बाद ही नोटिस और कार्रवाई क्यों शुरू होती है। हर साल मानसून से पहले सर्वे, नोटिस, विरोध और फिर कार्रवाई ठंडे बस्ते में जाने का सिलसिला चलता रहा है। इस बार भी स्थिति बहुत अलग नजर नहीं आ रही।

हादसों के बाद भी सबक नहीं

भोपाल में जर्जर भवनों से जुड़े हादसे पहले भी हो चुके हैं। 25 जून 2025 को टीटी नगर के पुराने एमएलए क्वार्टर के पीछे स्थित करीब 50 साल पुराने जर्जर सरकारी आवास का हिस्सा बारिश के दौरान गिर गया था। इसमें वहां रह रहे युवक अमित कुमार की मौत हो गई थी। हादसे के बाद इन भवनों को गिराने की जरूरत पर सवाल उठे थे।

इसके बाद अगस्त 2025 में कोहेफिजा स्थित पुराने सचिवालय की जर्जर इमारत में हुजूर एसडीएम कार्यालय की छत का प्लास्टर और फॉल सीलिंग गिर गई थी। घटना रात में होने से जनहानि नहीं हुई, लेकिन कार्यालय खाली कराना पड़ा था।

वहीं सितंबर 2026 में सिकंदरी सराय में बारिश के दौरान जर्जर मकान का हिस्सा गिरने की घटना सामने आई। इससे स्पष्ट है कि खतरा केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी मौजूद है।

पुराने शहर में सबसे ज्यादा खतरा

पुराने भोपाल में स्थिति ज्यादा गंभीर है। जून में हुए सर्वे के दौरान पुराने शहर की करीब 1500 इमारतें जर्जर मिली थीं, जिनमें 242 को भारी बारिश में कभी भी गिरने के गंभीर खतरे वाली श्रेणी में बताया गया था।

ओल्ड सुभाष नगर और गौतम नगर में 327 जर्जर भवन चिह्नित हैं। ऐशबाग की जनता क्वार्टर ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में करीब 600 मकान लंबे समय से जर्जर बताए जा रहे हैं। इन्हें वर्ष 2016 में ही जर्जर घोषित किए जाने की बात सामने आई है।

बारिश खत्म होने का इंतजार या कार्रवाई अभी?

बारिश का दौर अभी करीब एक महीने और चल सकता है। ऐसे में तेज बारिश, आंधी या लगातार पानी गिरने से कमजोर भवनों के अचानक गिरने का खतरा बढ़ सकता है। सवाल यही है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करेगा या चिन्हित भवनों को प्राथमिकता के आधार पर खाली कराकर सुरक्षित तरीके से हटाएगा। सर्वे और नोटिस तभी सार्थक हैं, जब उनके बाद समय पर जमीन पर कार्रवाई भी दिखाई दे।

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