पटवारी को निष्पादक और राजस्व अधिकारियों को पंजीयक की शक्तियां देने पर उठाए सवाल, रिकॉर्ड सुधार के बाद ही पंजीयन की मांग
भोपाल। भारत सरकार की स्वामित्व योजना-2020 और मध्यप्रदेश शासन की प्रस्तावित ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के क्रियान्वयन को लेकर मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ ने विधिक और व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने की मांग की है। संघ ने शासन से योजना लागू करने से पहले रिकॉर्ड की विसंगतियां दूर करने और अधिकारियों को स्पष्ट कानूनी संरक्षण देने का आग्रह किया है।
संघ के अनुसार स्वामित्व योजना के तहत जारी अधिकार अभिलेख भू-राजस्व संहिता की धारा 107(1)(ख) के तहत तैयार किए गए हैं और इनमें भूखंड धारकों को भूमि स्वामी अधिकार दिए गए हैं। इन अभिलेखों को बैंक ऋण सहित शासन की विभिन्न योजनाओं के लिए वैधानिक दस्तावेज बताया गया है। ऐसे में इन अभिलेखों के आधार पर दोबारा पंजीयन की आवश्यकता और उससे पैदा होने वाली कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
संघ ने कहा कि स्वामित्व अभिलेख तैयार करते समय सभी धारकों की शत-प्रतिशत ई-केवाईसी नहीं हुई थी। इससे आधार में दर्ज नाम और राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाम में अंतर है। यदि केवल आधार के नाम के आधार पर पंजीयन किया गया तो खसरे के कॉलम-5 और पंजीयन के बाद कॉलम-12 में दर्ज नाम अलग हो सकते हैं। इससे भविष्य में विवाद और मुकदमेबाजी की स्थिति बनने की आशंका है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि पंजीकृत दस्तावेज में सुधार की प्रक्रिया सामान्य राजस्व रिकॉर्ड सुधार से अलग हो सकती है। इसलिए पंजीयन से पहले रिकॉर्ड की त्रुटियां दूर करने के लिए सरल व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। संघ ने बताया कि योजना लागू होने के बाद कुछ भूमि धारकों ने अपनी संपत्तियां अन्य लोगों को बेच दी हैं। कई मामलों में साइबर 2.0 के माध्यम से नामांतरण भी हो चुका है। ऐसे मामलों में पुराने दस्तावेजों के आधार पर दोबारा पंजीयन को लेकर व्यावहारिक कठिनाई हो सकती है।
अधिकारियों के विधिक संरक्षण की मांग
संघ ने योजना के तहत पटवारी को दस्तावेज का निष्पादक तथा राजस्व निरीक्षक, सहायक विस्तार अधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार आदि को पंजीयक की शक्तियां दिए जाने पर भी चिंता जताई है। निर्धारित समय में बड़ी संख्या में दस्तावेजों का निष्पादन होने से मानवीय चूक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सिविल और आपराधिक मामले दर्ज होने की आशंका जताते हुए संघ ने स्पष्ट विधिक संरक्षण के प्रावधान करने की मांग की है।
ज्ञापन में रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत उप पंजीयक को प्राप्त अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि तहसीलदारों को पंजीयन की शक्तियां देने के लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। साथ ही शासकीय आबादी की भूमि को निजी भूमि स्वामित्व में दिए जाने की प्रक्रिया में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 158(3) और 165(7) के तहत कलेक्टर की अनुमति से संबंधित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
संघ ने शासन से योजना के विधिक और व्यावहारिक पहलुओं की समीक्षा के लिए शीघ्र समिति गठित करने तथा रिकॉर्ड सुधार के स्पष्ट नियम बनाने के बाद ही पंजीयन प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है।
