सील किया साक्षी ढाबा फिर मिला संचालित
रहवासी समिति ने पूछा-आखिर सील खुली कैसे?
निगमायुक्त को की शिकायत
भोपाल, 14 सितंबर. आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई अब सील लगाने के बाद उसकी निगरानी को लेकर सवालों में घिर गई है. नीलबड़-भदभदा क्षेत्र स्थित साक्षी ढाबे को निगम ने सील किया था, लेकिन 13 सितंबर को खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में ढाबा संचालित मिला. इसके बाद संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने निगम आयुक्त को शिकायत देकर ढाबे को तत्काल दोबारा सील करने और यह पता लगाने की मांग की है कि सील लगने के बाद प्रतिष्ठान दोबारा कैसे खुला. मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सीलिंग कार्रवाई से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होनी है. समिति का सवाल है कि यदि निगम ने ढाबा खोलने की अनुमति नहीं दी थी तो सील किसने हटाई या तोड़ी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
-खाद्य सुरक्षा की कार्रवाई ने बढ़ाई निगम की परेशानी
समिति के अनुसार 13 सितंबर को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने साक्षी ढाबे का निरीक्षण कर कार्रवाई की. जिस ढाबे पर नगर निगम ने सील लगाई थी, वहां दोबारा गतिविधियां संचालित मिलना सीलिंग व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. समिति ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई से जुड़े पंचनामा, निरीक्षण रिपोर्ट, लिए गए नमूने, फोटो और वीडियो को निगम की जांच में शामिल करने की मांग की है. साथ ही सील किए गए दूसरे प्रतिष्ठानों का भी सर्वे कराने की मांग की गई है, ताकि यह पता चल सके कि कहीं और भी सीलिंग के बाद गतिविधियां तो शुरू नहीं हो गई हैं. समिति का कहना है कि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए और जरूरत पडऩे पर इसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी जाने वाली रिपोर्ट में भी शामिल किया जाना चाहिए.
-सीलिंग फोटो खिंचवाने की कार्रवाई नहीं
रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि यह केवल साक्षी ढाबे का मामला नहीं, बल्कि नगर निगम की पूरी सीलिंग कार्रवाई की विश्वसनीयता का सवाल है. उनका कहना है कि सीलिंग कोई फोटो खिंचवाने की कार्रवाई नहीं है. याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि आम दुकानदारों पर सख्ती की जा रही है, तो सील किए गए प्रतिष्ठान के दोबारा खुलने पर जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की जा रही. समिति सदस्य पूर्णेंदु शुक्ला ने कहा कि अब केवल दोबारा सील लगाने की खानापूर्ति नहीं, बल्कि यह पता लगाना जरूरी है कि सील कैसे खुली और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वह इसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी उठाएगी.
