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्रदूषण विभाग के कर्मचारी का संचालित रेस्टोरेंट और स्पोर्ट कोर्ट मिलने का दावा, खजूरी सड़क पर ईंट फैक्ट्री भी जांच के दायरे में
भोपाल, 7 सितंबर। बड़े तालाब के कैचमेंट की सीमा तय करने के लिए एनजीटी की ओर से गठित टीम का तीसरे दिन भी सर्वे जारी रहा। सोमवार को दोपहर 1:30 बजे से शाम 6:15 बजे तक टीम ने चिरायु अस्पताल से कोलांस नदी तक ड्रोन सर्वे और मौके पर ग्राउंड ट्रुथिंग की। बड़े तालाब का जलस्तर एफटीएल तक पहुंचने के बाद पानी की वास्तविक सीमा देखने के लिए यह सर्वे किया जा रहा है। एनजीटी के निर्देश पर प्रशासन ने भदभदा के गेट खोलने पर भी रोक लगाई है।
सर्वे के दौरान बैरसिया विधायक विष्णु खत्री का कोलूखेड़ी स्थित फार्म हाउस सामने आया। टीम के अनुसार फार्म हाउस तक पहुंचने के लिए कैचमेंट और वेटलैंड क्षेत्र के अंदर सड़क बनाई गई है। यह सड़क एफटीएल तय करने के लिए नगर निगम द्वारा लगाई गई दो मुनारों के बीच से होकर फार्म हाउस तक जाती है। फार्म हाउस भी मुनारों से सटाकर बनाया गया बताया गया है।
12 से अधिक मुनारों के बाहर पानी
सर्वे में भैंसाखेड़ा के बड़े अस्पताल के सामने से भैंसाखेड़ी, जमुनिया छीर, कोलूखेड़ी और खजूरी सड़क तक 12 से अधिक मुनारें पानी में डूबी मिलीं। कई स्थानों पर मुनारों से करीब 5 से 10 फीट आगे तक पानी का फैलाव पाया गया। कुछ मुनारें कपड़ों से ढकी हुई भी मिलीं। इससे एफटीएल तय करने के लिए पहले लगाई गई मुनारों की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
टीम के सदस्य और वरिष्ठ पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडेय तथा याचिकाकर्ता राशिद नूर ने बताया कि सर्वे में पानी का फैलाव मुनारों के बाहर तक मिला है। उनका कहना है कि फिलहाल टीम कैचमेंट में पानी के फैलाव की स्थिति देख रही है और इसकी रिपोर्ट एनजीटी को दी जाएगी।
एफटीएल में मलबा भराव और मकान
सर्वे के दौरान ईशा अंबानी से जुड़े परिसर में एफटीएल क्षेत्र के अंदर करीब छह फीट मलबा भराव किए जाने की बात सामने आई। राकेश शर्मा नामक व्यक्ति का मकान भी तालाब क्षेत्र के अंदर पाया गया। इसके अलावा सीआई ऑटोमोबाइल का यार्ड एफटीएल से लगा हुआ मिला।
वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े एक कर्मचारी द्वारा तालाब के नजदीक कब्जा कर रेस्टोरेंट और स्पोर्ट कोर्ट संचालित किए जाने की जानकारी भी सर्वे में सामने आने का दावा किया गया है। इन सभी निर्माणों की वास्तविक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और तकनीकी जांच के बाद स्पष्ट होगी।
इंदौर रोड से बैरागढ़ तक निर्माण
ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान भौंरी, कोलूखेड़ी, खजूरी सड़क और बैरागढ़ सहित कई क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया। इंदौर रोड के मुख्य मार्ग से लेकर कैचमेंट क्षेत्र में ढाबे, होटल, रेस्टोरेंट और ईंट फैक्ट्री सहित कई पक्के निर्माण सामने आए हैं। टीम ने भौंरी सीपीए वृक्षारोपण, कैंपियन स्कूल कार परिसर के सामने, भौंरी जोड़, द आर्क के सामने, वायु होटल, यश ढाबा, कोलूखेड़ी, कर्व रेस्टोरेंट फिलिंग साइट, खजूरी सड़क ईंट कारखाना, बहता गांव बैरागढ़, आकाश गार्डन के पीछे ग्रीन क्लासिक रिजॉर्ट और नायरा पेट्रोल पंप के पीछे सेवन ओक्स क्षेत्र में भी ग्राउंड ट्रुथिंग की।
खजूरी सड़क की ईंट फैक्ट्री को लेकर भी सवाल उठे हैं। बताया गया कि यह फैक्ट्री एनजीटी में पार्टी है। इसके बावजूद प्रशासन और नगर निगम की ओर से नोटिस नहीं दिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विभागीय अमले की मौजूदगी पर सवाल
सर्वे के दौरान सीपीसीबी, एमपीपीसीबी के अधिकारी-कर्मचारी, पटवारी, वरिष्ठ पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडेय और याचिकाकर्ता राशिद नूर मौजूद रहे। टीम के अनुसार अलग-अलग हल्कों के पटवारियों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। केवल बहेटा गांव में पटवारी पहुंचे। नगर निगम और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी सर्वे में नजर नहीं आए।
झील संरक्षण प्रकोष्ठ के प्रभारी संतोष गुप्ता करीब 10 मिनट के लिए मौके पर पहुंचे और इसके बाद वापस चले गए। टीम का कहना है कि एफटीएल और कैचमेंट की सही सीमा तय करने के लिए राजस्व रिकॉर्ड, मुनारों की लोकेशन, पानी के फैलाव और मौके पर मिले निर्माणों का वैज्ञानिक तरीके से मिलान जरूरी है। सर्वे की रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी जाएगी, जिसके बाद इन निर्माणों और कैचमेंट की वास्तविक स्थिति पर आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी।
