एम्स भोपाल में नेत्रदान पखवाड़े पर नेशनल सीएमई, 100 से अधिक विशेषज्ञ शामिल

भोपाल। 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर एम्स भोपाल के नेत्र विज्ञान विभाग की ओर से एक दिवसीय नेशनल सीएमई (सतत चिकित्सा शिक्षा) का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से आए 100 से अधिक नेत्र रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा शिक्षक और रेजिडेंट डॉक्टर शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ आधुनिक नेत्र चिकित्सा तकनीकों पर विशेषज्ञों के बीच चर्चा करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (रि.) ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में लगातार नई जानकारी सीखने और अंधत्व की रोकथाम के लिए आधुनिक उपचार पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने नेत्रदान पखवाड़े के दौरान लोगों को मरणोपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता भी बताई।

डॉ. बीके जैन को दी श्रद्धांजलि

उद्घाटन सत्र में डॉ. प्रो. भावना शर्मा ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट, चित्रकूट के पूर्व निदेशक एवं ट्रस्टी पद्मश्री स्वर्गीय डॉ. बी.के. जैन के चिकित्सा और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान को याद किया। इस दौरान उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गई।

कॉर्निया, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा पर चर्चा

सीएमई में कॉर्निया प्रत्यारोपण, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा से संबंधित आधुनिक उपचार तकनीकों, चुनौतियों और उनके समाधान पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की।

पद्मश्री प्रो. डॉ. जे.एस. टिटियाल ने मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान आंख के एंडोथेलियम की सुरक्षा और सुरक्षित फेको सर्जरी पर व्याख्यान दिया। उन्होंने स्नातकोत्तर छात्रों के साथ मेंटरशिप को लेकर इंटरैक्टिव सत्र भी लिया।

डॉ. रितु अरोड़ा ने वायरल केराटाइटिस के निदान और उपचार तथा कॉर्निया और ऑक्युलर सरफेस के पुनर्निर्माण की आधुनिक तकनीकों पर जानकारी दी। वहीं सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट के कंसल्टेंट डॉ. राकेश शाक्य ने मोतियाबिंद और ग्लूकोमा सर्जरी के दौरान होने वाली जटिलताओं तथा उनके प्रबंधन पर चर्चा की।

विशेषज्ञों के बीच हुआ पैनल डिस्कशन

वैज्ञानिक सत्रों के बाद पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें डॉक्टरों ने विशेषज्ञ वक्ताओं से उपचार और सर्जरी से जुड़े सवाल किए। चर्चा के दौरान आधुनिक नेत्र चिकित्सा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति ने अतिथियों, वक्ताओं और चिकित्सकों का आभार जताया। प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत लोगों को मरणोपरांत नेत्रदान के लिए जागरूक करने और कॉर्निया से होने वाले अंधत्व को कम करने के लिए प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।

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