भोपाल। विश्व स्पाइनल कॉर्ड इंजरी दिवस के अवसर पर एम्स भोपाल के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग (पीएमआर) की ओर से 5 सितंबर को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य रीढ़ की हड्डी में चोट से होने वाली समस्याओं, समय पर उपचार, सुरक्षित तरीके से मरीज को अस्पताल पहुंचाने और पुनर्वास के प्रति लोगों को जागरूक करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (रि.) रहे। इस अवसर पर डीन एकेडमिक्स एवं पीएमआर के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी और सह-प्राध्यापक डॉ. विठ्ठल प्रकाश पुरी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई।
नियमित पुनर्वास से बेहतर हो सकती है स्थिति
कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल ने पुनर्वास चिकित्सा की बढ़ती जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास सेवाओं का नियमित रूप से लाभ लेने पर मरीज को बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। उन्होंने प्रेरक उदाहरण देते हुए कहा कि लकवे के बाद भी मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर व्यक्ति बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है।
प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी ने पीएमआर विभाग की ओर से मरीजों को दी जा रही उपचार और पुनर्वास सेवाओं की सराहना की।
चोट के बाद मरीज को सावधानी से अस्पताल पहुंचाना जरूरी
डॉ. विठ्ठल प्रकाश पुरी ने स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के कारण, उपचार और बचाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को उठाने और अस्पताल ले जाने में सावधानी जरूरी है। गलत तरीके से उठाने या ले जाने से रीढ़ की चोट और गंभीर हो सकती है।
कार्यक्रम में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से प्रभावित मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने पीएमआर विभाग में मिले उपचार और पुनर्वास सेवाओं से हुए सुधार की जानकारी देते हुए चिकित्सकों और स्टाफ के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम का संचालन फिजियोथेरेपिस्ट मयंक चंदेल और पीएमआर विभाग की जूनियर रेजिडेंट डॉ. हेलेना जाबीन शफीक ने किया।
इस वर्ष कार्यक्रम का संदेश रहा—“रोकथाम करें, सुरक्षा दें, सशक्त बनाएं—स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से प्रभावित लोगों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण।” कार्यक्रम के माध्यम से चोट की रोकथाम, समय पर उपचार, पुनर्वास और प्रभावित लोगों के सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
