वन समिति सुरक्षा श्रमिकों के न्यूनतम वेतन मामले में हाईकोर्ट सख्त, प्रधान मुख्य वन संरक्षक 18 सितंबर को तलब

भुगतान आदेशों का पालन नहीं करने पर नाराजगी; हाईकोर्ट ने पूछा- प्राइवेट वकील क्यों नियुक्त किया, सरकारी खजाने के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
भोपाल, 24 अगस्त। वन समिति सुरक्षा श्रमिकों और चौकीदारों को न्यूनतम वेतन नहीं दिए जाने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने वन विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, मध्यप्रदेश भोपाल को 18 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर विभाग की ओर से जवाब देने के निर्देश दिए हैं। मामला वन मंडल सतना के अमरपाटन वन परिक्षेत्र की विभिन्न समितियों में कार्यरत सुरक्षा श्रमिकों के न्यूनतम वेतन से जुड़ा है।
श्रमिकों के पक्ष में पारित हो चुके हैं भुगतान आदेश
मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडेय के अनुसार, श्रमिकों ने न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत अपने पारिश्रमिक के लिए सहायक श्रमायुक्त एवं प्राधिकारी, न्यूनतम वेतन अधिनियम, रीवा संभाग सतना के समक्ष अपना पक्ष रखा था। इसके बाद प्राधिकारी ने 6 नवंबर 2019, 30 जुलाई 2024 और 31 जुलाई 2024 को श्रमिकों के पक्ष में भुगतान के आदेश जारी किए थे।
संगठन का आरोप है कि वन विभाग ने इन आदेशों का पालन करने के बजाय न्यायालय में चुनौती देने का रास्ता अपनाया।
पहले की याचिका हाईकोर्ट से हो चुकी है खारिज
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तत्कालीन वन मंडलाधिकारी सतना राजीव कुमार मिश्रा ने शासकीय अधिवक्ता की राय को दरकिनार करते हुए प्राइवेट वकील के माध्यम से हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की थी। संगठन के मुताबिक यह याचिका 22 सितंबर 2022 को खारिज कर दी गई थी।
इसके बाद वन मंडलाधिकारी विपिन कुमार पटेल की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध रिव्यू पिटिशन RP 1113/2023 दायर की गई।
कोर्ट ने टैक्सपेयर्स के पैसे को लेकर जताई नाराजगी
21 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। विभाग की ओर से प्रस्तुत अतिरिक्त दलीलों पर न्यायालय ने असंतोष व्यक्त किया। आदेश में न्यायालय ने कहा कि देरी माफी के आवेदन से अदालत संतुष्ट नहीं है और अधिकारियों को करदाताओं के पैसे का संरक्षक बताते हुए सरकारी धन को अपनी मर्जी से खर्च करने पर गंभीर टिप्पणी की।
18 सितंबर को बताना होगा प्राइवेट वकील क्यों नियुक्त किया
हाईकोर्ट ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर दो महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय जानना चाहता है कि रिव्यू पिटिशन के लिए प्राइवेट वकील क्यों नियुक्त किया गया और इस प्रक्रिया से शासकीय खजाने को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
47 अन्य मामलों का भी दावा
मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के अनुसार, इसी तरह के 47 अन्य मामलों में भी संबंधित प्राधिकारी श्रमिकों के पक्ष में भुगतान के आदेश जारी कर चुके हैं। संगठन का कहना है कि इन आदेशों का पालन नहीं होने के कारण हाईकोर्ट में अवमानना याचिका CONC 1855/2026 लंबित है।
कर्मचारी मंच ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर वन समिति सुरक्षा श्रमिकों और चौकीदारों को न्यायालय एवं प्राधिकारी के आदेशों के अनुसार तत्काल न्यूनतम वेतन का भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि श्रमिकों के अधिकारों के साथ-साथ सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।





