रेलवे कर्मचारी के चरित्र सत्यापन और नियमित नियुक्ति पर उठे सवाल

पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज मामलों और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया की जांच की मांग**
भोपाल। पश्चिम मध्य रेलवे में कर्मचारी गणेश सोनवणे की नियमित नियुक्ति, पदस्थापना और ड्यूटी में कथित विशेष सुविधा को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कर्मचारी को लंबे समय से संरक्षण दिया जा रहा है। साथ ही, उसकी पदस्थापना और ड्यूटी व्यवस्था की जांच कराने की मांग की गई है।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, यांत्रिक और विद्युत विभाग के 62 अस्थायी दर्जा प्राप्त एवजी खलासियों की स्क्रीनिंग के बाद उपयुक्त पाए गए कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। गणेश सोनवणे की स्क्रीनिंग में उन्हें उपयुक्त पाया गया था, लेकिन उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई (एसएफ-5) लंबित होने के कारण 25 जनवरी 2012 को उनका परिणाम घोषित नहीं किया गया था।
दस्तावेजों के मुताबिक, विभागीय कार्रवाई के बाद 12 अप्रैल 2012 को एक वर्ष के लिए वेतन वृद्धि रोकने की सजा दी गई। इसके बाद 13 अप्रैल 2012 को उनके नियमितीकरण और पदस्थापना का आदेश जारी किया गया। उन्हें हेल्पर-2 के पद पर वेतनमान 5200-20200 रुपये और 1800 रुपये ग्रेड पे के तहत नियमित किया गया।
चरित्र सत्यापन से जुड़े पुलिस रिकॉर्ड में इटारसी थाने में उनके खिलाफ चार प्रकरण दर्ज होने का उल्लेख है। इनमें तीन आपराधिक मामले थे, जिनमें न्यायालय ने 2010 में उन्हें दोषमुक्त कर दिया था। इसके अलावा, वर्ष 2009 में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 110 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का भी उल्लेख है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कर्मचारी का अंतर-जोन तबादला नहीं किया गया और उसे यार्ड में भी स्थानांतरित नहीं किया गया। साथ ही, केवल दो घंटे ड्यूटी की सुविधा दिए जाने का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की गई है।
हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों में तीन मामलों में दोषमुक्त होने का उल्लेख है। धारा 110 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई अपने आप में आपराधिक मामले में दोषसिद्धि नहीं है। इसलिए नियुक्ति और ड्यूटी संबंधी आरोपों की पुष्टि के लिए रेलवे के संबंधित आदेशों और नियमों की जांच जरूरी है।





