मिलावटखोरों पर 3.15 करोड़ का जुर्माना, वसूली सिर्फ 1.23 करोड़

प्रदेश में 1,894 मामले लंबित, नरसिंहपुर, उज्जैन और भिंड में सबसे ज्यादा प्रकरण अटके

भोपाल। प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन जुर्माने की पूरी राशि वसूलने और मामलों के निपटारे में विभाग के सामने चुनौती बनी हुई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के एक अप्रैल से 22 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, मिलावट से जुड़े मामलों में 3 करोड़ 15 लाख 83 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसमें से केवल 1 करोड़ 23 लाख 71 हजार 150 रुपये ही वसूले जा सके। करीब 1 करोड़ 92 लाख रुपये की राशि अब भी वसूलना बाकी है।

इस अवधि में 1,081 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जबकि 1,894 मामले लंबित रहे। आंकड़े बताते हैं कि मिलावट के खिलाफ कार्रवाई के साथ जुर्माने की वसूली और लंबित मामलों के निपटारे पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

नरसिंहपुर में सबसे ज्यादा मामले लंबित

जिलेवार आंकड़ों में नरसिंहपुर 344 लंबित मामलों के साथ सबसे आगे है। उज्जैन में 285 और भिंड में 189 मामले लंबित हैं। मुरैना और जबलपुर में 121-121, धार में 92 और भोपाल में 68 मामले अटके हुए हैं। देवास में 50, अशोकनगर में 46, ग्वालियर में 37 और इंदौर में 30 प्रकरण लंबित हैं।

इसके अलावा सतना में 28, रीवा में 27 तथा खंडवा, खरगोन, सीहोर और सीधी में 25-25 मामले लंबित हैं। कई अन्य जिलों में भी प्रकरणों का निराकरण होना बाकी है। ऐसे में लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जरूरत है।

ग्वालियर में सबसे ज्यादा प्रकरणों का निराकरण

प्रकरणों के निपटारे में ग्वालियर सबसे आगे रहा। यहां 167 मामलों का निराकरण किया गया। धार में 81, जबलपुर में 64, छिंदवाड़ा-पांढुर्णा और मुरैना में 57-57 तथा भोपाल और उज्जैन में 54-54 प्रकरणों का निपटारा हुआ। रीवा में 35, सतना में 34 और कटनी व खरगोन में 32-32 मामलों का निराकरण किया गया। हालांकि, कई जिलों में लंबित मामलों की तुलना में निराकरण की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है। समय पर कार्रवाई नहीं होने से मिलावट से जुड़े मामलों के निपटारे में देरी हो सकती है।

धार में 79.95 लाख का जुर्माना, वसूली 6.35 लाख

जुर्माने और उसकी वसूली के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर सामने आया है। धार में 79.95 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया, लेकिन वसूली केवल 6.35 लाख रुपये हुई। ग्वालियर में 66.84 लाख रुपये के जुर्माने के मुकाबले 21.82 लाख रुपये वसूले गए। इंदौर में 50.50 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया और 16.76 लाख रुपये की वसूली हुई।

भिंड में 45.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, लेकिन वसूली सिर्फ 2 लाख रुपये हुई। मुरैना में 42.85 लाख रुपये के अर्थदंड के मुकाबले 2.40 लाख रुपये ही वसूले गए। भोपाल में 6.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और 4.36 लाख रुपये की वसूली हुई।

सीधी में 50 हजार, सिंगरौली में 30 हजार और पन्ना में 65 हजार रुपये का अर्थदंड लगाए जाने के बावजूद वसूली दर्ज नहीं हुई। वहीं, रीवा में 8.50 लाख रुपये के अर्थदंड के मुकाबले 12.13 लाख रुपये की वसूली दर्ज की गई। यह अंतर पूर्व में लगाए गए जुर्मानों की वसूली के कारण भी हो सकता है।

अब सवाल यह है कि विभाग लंबित मामलों को कम करने और बकाया जुर्माने की वसूली बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाता है। मिलावट के खिलाफ कार्रवाई का असर बढ़ाने के लिए जरूरी है कि मामलों का समय पर निपटारा हो और लगाए गए जुर्माने की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।

Exit mobile version