चार प्रस्तावों में से तीन पारित, छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर का प्रस्ताव संशोधन के लिए लौटा
भोपाल। नगर निगम परिषद की शनिवार को हुई बैठक में करोड़ों रुपये के प्रस्तावों पर चर्चा के साथ कई जनहित के मुद्दे भी उठे। बैठक में 13 सवाल चर्चा के लिए रखे गए थे, लेकिन आठ पर ही चर्चा हो सकी। चार प्रस्तावों में से तीन पारित हुए, जबकि गर्ल्स कॉलेज के पास सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर को किराये पर देने का प्रस्ताव संशोधन के लिए लौटा दिया गया।
बैठक में नई मार्केट की बहुमंजिला पार्किंग के चौथे तल को किराये पर देने के प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के ‘मैं कमीशन नहीं लेती’ बयान से हंगामा हो गया। भाजपा पार्षदों ने उनसे माफी मांगने की मांग की, जबकि कांग्रेस पार्षद उनके समर्थन में आ गए। विवाद के कारण सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए रोकनी पड़ी। हालांकि, हंगामे के बावजूद पार्किंग का प्रस्ताव पारित हो गया।
नए निगम मुख्यालय के सेवा खंड और भोजनालय को 20 साल तक किराये पर देने की तैयारी
नए निगम मुख्यालय के सेवा खंड और भोजनालय को किराये पर देने का प्रस्ताव भी पारित हो गया। इसके तहत शुरुआती 10 साल के लिए किराये पर देने और जरूरत के अनुसार अगले 10 साल की अवधि बढ़ाने का प्रावधान है। इस तरह अधिकतम 20 साल तक परिसर किराये पर दिया जा सकेगा। पहले इस व्यवस्था के लिए दो साल की अवधि प्रस्तावित होने की बात सामने आई थी। अब लंबी अवधि तय होने से निगम को होने वाली आय और किराये की शर्तों पर चर्चा जरूरी होगी।
छात्राओं की सुरक्षा पर प्रस्ताव वापस
गर्ल्स कॉलेज के पास सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर को शुरुआती तीन साल के लिए किराये पर देने और बाद में तीन साल की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसमें सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा कर्मचारियों की व्यवस्था जैसी शर्तें शामिल थीं। इसके बावजूद महापौर परिषद के सदस्य जगदीश यादव ने प्रस्ताव में संशोधन की जरूरत बताई। इसके बाद इसे वापस कर दिया गया। अब संशोधन के बाद इसे दोबारा परिषद में लाया जा सकता है।
अमृत योजना के लिए 493.49 करोड़ का ऋण मंजूर
अमृत 2.0 योजना के तहत 493.49 करोड़ रुपये का ऋण लेने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने बड़े तालाब के प्रदूषण और पुराने शहर के तालाबों की स्थिति पर सवाल उठाए। अंकिता कंस्ट्रक्शन से जुड़ी फाइल की जांच कराने की मांग भी की गई। पार्षद अजीजुद्दीन ने परियोजना का काम किसी दूसरे विभाग को सौंपने का सुझाव दिया। बहस के बाद ऋण प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।
दिशा-सूचक पट्टों से 9.14 करोड़ की आय
शहर के 85 वार्डों में लगाए गए 95 दिशा-सूचक पट्टों से विज्ञापन के जरिए निगम को आय हो रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इनसे 9.14 करोड़ रुपये मिले, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 6.79 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई है। पार्षद नसीम गफूर ने इन पट्टों पर राजनीतिक नेताओं के चित्र लगाए जाने पर आपत्ति जताई। सभापति किशन सूर्यवंशी ने निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को पोस्टर और बैनर हटाने के निर्देश दिए। सार्वजनिक शौचालयों पर लगे अनधिकृत विज्ञापनों का मुद्दा भी उठा।
शिक्षा उपकर खर्च करने और स्कूल सुधारने की मांग
पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने शिक्षा उपकर की राशि का पूरा उपयोग नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सालाना राशि जमा होने के बावजूद केवल 12 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों के विकास पर यह राशि खर्च करने की मांग की। सभापति ने आयुक्त को शिक्षा उपकर का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
दूषित पानी की 901 शिकायतों के निराकरण का दावा
बैठक में विसर्जन घाट का काम पूरा नहीं होने, सफाई कर्मचारियों की कमी और दूषित पानी की शिकायतों पर भी चर्चा हुई। पार्षद मोहम्मद सरवर ने सभी 85 वार्डों में सफाई कर्मचारियों की जरूरत का आकलन कर भर्ती करने की मांग की।
पार्षद देवांशु कंसाना ने दूषित पानी का मुद्दा उठाया। महापौर परिषद के सदस्य रविंद्र यति ने बताया कि निजी नलकूपों से लिए गए पानी के चार नमूने जांच में असफल पाए गए हैं। उन्होंने दूषित पानी से जुड़ी 901 शिकायतों का निराकरण किए जाने की जानकारी भी दी। कंसाना ने अपने वार्ड में चार इंच की पाइपलाइन की जगह छह से आठ इंच की पाइपलाइन डालने की मांग की, जिसका अन्य पार्षदों ने समर्थन किया।
छुट्टी के दिन बैठक बुलाने पर भी आपत्ति
बैठक की शुरुआत में राज्य सरकार की ओर से नियुक्त 12 एल्डरमैन का परिचय कराया गया। नए निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार का भी सदन में परिचय हुआ। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने छुट्टी के दिन परिषद का सम्मेलन बुलाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने निगम अधिनियम का हवाला देते हुए सवाल उठाया। सभापति किशन सूर्यवंशी की समझाइश के बाद कार्यवाही आगे बढ़ी।
बैठक में प्रमुख मुद्दे: 493.49 करोड़ रुपये का ऋण, निगम संपत्तियों को लंबी अवधि के लिए किराये पर देना, विज्ञापन से आय, स्कूलों में शिक्षा उपकर का उपयोग, दूषित पानी और सफाई व्यवस्था।
