मास्टर प्लान की समिति में शामिल सरपंचों से ड्राफ्ट बनाने के दौरान नहीं ली राय

-74 पंचायतों के सरपंचों को बनाया था सदस्य
-ड्राफ्ट तैयार होने के बाद हो रही बैठक पर उठे सवाल
भोपाल, 28 अक्टूबर. शहर और गांवों के भविष्य की तस्वीर तय करने वाले भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार करते समय ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की राय नहीं लिए जाने का मामला सामने आया है. मास्टर प्लान की तैयारी के लिए बनाई गई समिति में भोपाल जनपद और जिला पंचायत अध्यक्ष सहित 74 पंचायतों के सरपंचों को सदस्य बनाया गया था. इसके बावजूद ड्राफ्ट तैयार करने के दौरान इन प्रतिनिधियों को बैठक में नहीं बुलाया गया. अब सवाल उठ रहे हैं कि जब समिति में गांवों का प्रतिनिधित्व शामिल किया गया था, तो योजना तैयार करते समय उनकी राय क्यों नहीं ली गई. कुछ दिन पहले टीएंडसीपी कार्यालय में हुए किसानों के प्रदर्शन के दौरान भी ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर सवाल उठाए गए थे. किसानों का कहना था कि गांवों की जमीन, खेती, बसाहट, रास्तों और स्थानीय जरूरतों की वास्तविक जानकारी सरपंचों और जनपद प्रतिनिधियों को होती है. यदि ड्राफ्ट तैयार करने से पहले उनसे सुझाव लिए जाते, तो कई समस्याओं और आपत्तियों का समाधान शुरुआती स्तर पर ही निकाला जा सकता था. ग्रामीण प्रतिनिधियों का कहना है कि अब मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर आपत्तियां दर्ज कराने और उनके समाधान की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है. उनका मानना है कि गांवों की जरूरतों को पहले ही समझ लिया जाता, तो किसानों और ग्रामीणों को बाद में आपत्तियां उठाने की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता. वहीं, टीएंडसीपी विभाग की ओर से कहा जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी और सभी को बुलाया जाएगा. हालांकि, ग्रामीण प्रतिनिधियों का सवाल है कि जब ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और उस पर आपत्तियां भी आने लगी हैं, तब होने वाली बैठक में उनके सुझाव कितने प्रभावी साबित होंगे. सरपंचों को समिति में शामिल करने का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों और समस्याओं को मास्टर प्लान में जगह देना था. ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि योजना तैयार करने के शुरुआती चरण में ही ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से चर्चा क्यों नहीं की गई.
इंदौर का आर्थिक रोडमैप जारी, भोपाल की रिपोर्ट कब आएगी : क्रेडाई
इंदौर आर्थिक क्षेत्र-2047 की रिपोर्ट जारी होने के बाद क्रेडाई भोपाल ने राजधानी के आर्थिक रोडमैप को सार्वजनिक करने की मांग की है. क्रेडाई के अनुसार, अक्टूबर 2025 में भोपाल और इंदौर दोनों को ग्रोथ-हब पहल के पहले चरण में शामिल किया गया था, लेकिन भोपाल की रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है. क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने कहा कि भोपाल के विकास के लिए रोजगार, उद्योग, परिवहन, पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित समयबद्ध योजना जरूरी है. संगठन ने जबलपुर, ग्वालियर सहित अन्य बड़े शहरों को भी शहरी विकास की योजनाओं और आयोजनों में पर्याप्त भागीदारी देने की मांग की है.
इनका कहना है
हमे मास्टर प्लान के लिए जारी करने से पहले बैठक में नहीं बुलाया गया, जबकि सदस्यों के कमेटी में नाम शामिल है
-प्रमोद राजपूत, जनपद अध्यक्ष, फंदा भोपाल
मास्टर प्लान को लेकर आगामी बैठक की जाएगी, उस बैठक में कमेटी के सभी सदस्यों को बुलाया जाएगा.
-हरिओम, माहेश्वरी, सहायक संचालक, टीएंडसीपी भोपाल
-मास्टर प्लान को जारी करने से पहले हमें बैठक में बुलाया नहीं गया जबकि कमेटी की सूची में सभी सरपंचों के नाम है, जिससे सरपंचों ने प्लान में कमियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। अगर बैठक की जाती तो यह विसंगतियां सामने नहीं आती।
-खेमचंद पटेल, सरपंच, ग्राम पंचायत नाथू बरखेड़ा
हमे तो मालूम ही नहीं है कि कब बैठक हुई मास्टर प्लान जारी होने के बाद पता चला , वहीं कमेटी में हमारा नाम है यह भी जानकारी नहीं है, हमने मास्टर प्लान को लेकर आपत्ति दर्ज करवाई है
-बबलेश मीणा, सरपंच, ग्राम पंचायत इमलिया
हमें पता ही नहीं है कि मास्टर प्लान की कमेटी में शामिल किया गया है. इसकी हमें सूचना ही नहीं मिली.
-मोनिका मीना, सरपंच, ग्राम पंचायत चौपड़ाकला





