पोषण माह में एम्स भोपाल और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच समझौता

गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान से उपचार और फॉलोअप तक व्यवस्था होगी मजबूत

भोपाल। मध्यप्रदेश में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का राज्य स्तरीय शुभारंभ शुक्रवार को इंदौर के लता मंगेशकर सभागृह में हुआ। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास विभाग और एम्स भोपाल के बीच समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके जरिए प्रदेश में समुदाय आधारित तीव्र कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम को वैज्ञानिक और डेटा आधारित तरीके से मजबूत किया जाएगा।

समझौते के तहत गंभीर कुपोषण से प्रभावित बच्चों की पहचान, स्वास्थ्य जांच, उपचार, निगरानी, रेफरल और फॉलोअप की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य केवल बच्चों को कुपोषित के रूप में चिन्हित करना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर उचित देखभाल उपलब्ध कराना और परिवारों को पोषण संबंधी बेहतर व्यवहार के लिए जागरूक करना भी है।

राज्य उत्कृष्टता केंद्र देगा तकनीकी सहयोग

एम्स भोपाल के सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग के अंतर्गत संचालित राज्य उत्कृष्टता केंद्र इस कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग देगा। केंद्र कार्यक्रम से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर कमियों और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान करेगा। इसके आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग को तकनीकी सुझाव दिए जाएंगे।

केंद्र प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, डेटा विश्लेषण, कार्यक्रम की निगरानी, अनुसंधान और नवाचार के जरिए विभाग का सहयोग करेगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के साथ समुदाय की भागीदारी और जवाबदेही मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

समझौते को आगे बढ़ाने में एम्स भोपाल के सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अरुण एम. कोकणे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयुक्त संदीप जीआर ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

पोषण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि पोषण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, समाज और विभिन्न विभागों की भागीदारी से ही कुपोषण की समस्या से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य संसाधनों के इस्तेमाल और गर्भवती व धात्री माताओं के पोषण पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार ने भी पोषण अभियान में जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में वाराणसी से प्रसारित राष्ट्रीय वेबकास्ट भी दिखाया गया। इस दौरान ‘जीवन के पहले 1000 दिन’, ‘सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही’ और ‘हमारी आंगनवाड़ी-हमारी जिम्मेदारी’ विषयों पर प्रदर्शनी लगाई गई।

इस साझेदारी के जरिए एम्स भोपाल की चिकित्सा एवं तकनीकी विशेषज्ञता और महिला एवं बाल विकास विभाग की मैदानी पहुंच को जोड़कर पोषण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।

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