8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने लेवल-7 वेतनमान की मांग रखने की तैयारी, ट्रेन मैनेजरों की जिम्मेदारियों और सुरक्षा में भूमिका पर दिया जोर
भोपाल। भारतीय रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन में ट्रेन मैनेजरों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उनके वेतनमान में बढ़ोतरी की मांग उठाई गई है। ऑल इंडिया ट्रेन मैनेजर ग्रुप (AITMG) के अध्यक्ष और भोपाल मंडल के ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे ने अपनी टीम के साथ NFIR के संयुक्त महासचिव और WCRMS के महामंत्री अशोक शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान ट्रेन मैनेजर संवर्ग की प्रमुख मांगों, वेतनमान में सुधार और 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष पक्ष रखने को लेकर चर्चा हुई।
मुलाकात में पैसेंजर ट्रेन मैनेजर अश्विनी कुमार शर्मा और मनीष सोनी भी शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने ट्रेन मैनेजरों के शुरुआती वेतनमान को वर्तमान लेवल-5 से बढ़ाकर लेवल-7 करने की मांग रखी। यह स्तर पूर्व संशोधित ग्रेड पे 4,600 रुपये के समकक्ष बताया गया है।
रोमेश चौबे ने कहा कि ट्रेन मैनेजर केवल ट्रेन के अंतिम डिब्बे में तैनात कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि सुरक्षित रेल संचालन में उनकी अहम जिम्मेदारी होती है। उन्हें ट्रेन की स्थिति पर नजर रखने, संभावित खतरों को पहचानने और आपात परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने पड़ते हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारियों, तकनीकी दक्षता और कार्य की जोखिमपूर्ण परिस्थितियों के अनुरूप वेतनमान तय किया जाना चाहिए।
8वें वेतन आयोग के सामने उठेगा मुद्दा
AITMG की ओर से NFIR को एक तकनीकी प्रतिवेदन सौंपा गया है। इसमें ट्रेन मैनेजरों की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों, कार्य-परिस्थितियों और वेतनमान में सुधार की जरूरत का उल्लेख किया गया है। संगठन चाहता है कि इन मांगों को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने तथ्यों और तर्कों के साथ रखा जाए। इस प्रक्रिया में NFIR के महासचिव डॉ. एम. राघवैया सहित कर्मचारी संगठनों के अन्य प्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है। हालांकि, वेतनमान बढ़ाने की मांग रखना और आयोग या सरकार की ओर से उसे स्वीकार करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अंतिम निर्णय संबंधित सिफारिशों और सरकारी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
सुविधाओं में सुधार की भी मांग
ट्रेन मैनेजरों की मांग केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है। संगठन का मानना है कि कैडर विकास, पदोन्नति के अवसर, बेहतर प्रशिक्षण, पर्याप्त विश्राम सुविधाओं और आधुनिक तकनीकी संसाधनों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। ट्रेन मैनेजरों की भूमिका को रेखांकित करने के लिए लेखक दीपक कुमार की पुस्तक ‘रेल की धड़कन – ट्रेन मैनेजर’ का भी उल्लेख किया गया। पुस्तक में सुरक्षित रेल संचालन में ट्रेन मैनेजरों की सतर्कता, जिम्मेदारी और समर्पण को सामने रखा गया है।
AITMG का कहना है कि देशभर के ट्रेन मैनेजरों को एकजुट कर उनकी समस्याओं और मांगों को उचित मंच तक पहुंचाने के प्रयास जारी रहेंगे। संगठन को उम्मीद है कि कर्मचारी प्रतिनिधियों के सहयोग से वेतनमान और सेवा संबंधी मुद्दों पर प्रभावी चर्चा हो सकेगी।
