सरकार ने ईएनसी से तीन दिन में मांगा अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव
भोपाल। राजधानी के जीजी फ्लाईओवर यानी डॉ. भीमराव अंबेडकर सेतु पर सीमेंट-कांक्रीट की सड़क के ऊपर बिटुमिनस (डामर) वियरिंग कोर्स बिछाने के मामले में संबंधित इंजीनियरों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव कार्यालय ने इस मामले में प्रमुख अभियंता (ईएनसी) से संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तीन दिन में मांगा है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग, मंत्रालय से 27 अगस्त 2026 को पत्र जारी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि जीजी फ्लाईओवर पर पहले से निर्मित सीमेंट-कांक्रीट वियरिंग कोर्स के ऊपर बिटुमिनस वियरिंग कोर्स किया गया। इसके कारण सड़क लगातार क्षतिग्रस्त हो रही है।
विभाग ने सवाल उठाया है कि जब फ्लाईओवर पर पहले से सीमेंट-कांक्रीट वियरिंग कोर्स बना हुआ था, तो उसके ऊपर बिटुमिनस वियरिंग कोर्स क्यों किया गया। पत्र के अनुसार, यदि सीमेंट-कांक्रीट वियरिंग कोर्स में किसी तरह की क्षति या कमी थी और उसकी मरम्मत जरूरी थी, तो उसकी मरम्मत सीमेंट-कांक्रीट वियरिंग कोर्स के माध्यम से ही की जानी चाहिए थी।
विभाग ने इसे अनुबंध और गारंटी अवधि में संधारित आइटम से अलग परिवर्तन माना है। प्रमुख सचिव कार्यालय ने पूरे मामले का परीक्षण कर संबंधितों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तीन दिन में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। पत्र की प्रतिलिपि सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता को भी सूचना और तत्काल कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
गारंटी अवधि में मरम्मत को लेकर भी उठे सवाल
जीजी फ्लाईओवर के रखरखाव और मरम्मत को लेकर भी विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, फ्लाईओवर की मरम्मत के लिए करीब 4.69 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद टेंडर को लेकर अदालत ने हस्तक्षेप किया और फ्लाईओवर बनाने वाले ठेकेदार से गारंटी अवधि में मरम्मत कराने का निर्देश दिया।
अब डामर वियरिंग कोर्स किए जाने के मामले में विभागीय पत्र सामने आने के बाद संबंधित इंजीनियरों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है। हालांकि, किन अधिकारियों पर अंतिम रूप से कार्रवाई होगी, यह विभागीय जांच और प्रस्ताव के बाद स्पष्ट होगा।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में तत्कालीन और संबंधित इंजीनियरों की भूमिका की जांच की जा सकती है। इनमें प्रभारी ईई आत्माराम मोरे और पूर्व प्रभारी सीई संजय खांडे तथा जीपी वर्मा के नाम चर्चा में हैं। इन अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीमेंट-कांक्रीट वियरिंग कोर्स के ऊपर बिटुमिनस वियरिंग कोर्स कराने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है। सरकार द्वारा तीन दिन में कार्रवाई का प्रस्ताव मांगे जाने के बाद अब विभागीय कार्रवाई पर सभी की नजर है।अगर चाहें तो मैं इसका 80-100 शब्दों का बेहद तेज “ब्रेकिंग न्यूज” वर्जन, साथ में SEO हेडलाइन, Meta Description और 10 Keywords भी तैयार कर सकता हूं।
