जब अंतिम यात्रा भी कीचड़ से होकर गुजरने लगे, तो विकास के दावों पर सवाल

भोपाल। जब किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा भी कीचड़ और गंदगी से होकर गुजरने लगे, तो सवाल सिर्फ सड़क की बदहाली का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की संवेदनशीलता पर उठता है। गौ-हद धाम स्थित मुक्तिधाम की बदहाल व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
मंचों से विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मुक्तिधाम तक पहुंचने वाले रास्ते पर कीचड़ और गंदगी के कारण अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता के चलते शहर में कई जगह बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। लोगों का सवाल है कि जब अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील परिस्थिति में भी नागरिकों को मूलभूत सुविधा नहीं मिल पा रही है, तो विकास के दावों की हकीकत क्या है?
रहवासियों ने प्रशासन से मुक्तिधाम तक पहुंचने वाले मार्ग की तत्काल मरम्मत, जलभराव और कीचड़ की समस्या दूर करने तथा साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
सवाल यह है कि मंचों पर होने वाले भाषण और जमीन पर दिखाई देने वाली सच्चाई में इतना बड़ा अंतर क्यों है? आखिर प्रशासन और जनप्रतिनिधि कब अपनी ‘कुंभकर्णी नींद’ से जागेंगे?





