कृषि विश्वविद्यालय की CET पर विवाद, परीक्षा निरस्त करने की मांग

OBC आरक्षण और EWS को लेकर उठे सवाल, अभ्यर्थियों ने 6 नवंबर की परीक्षा रद्द कर नया विज्ञापन जारी करने की मांग की

ग्वालियर/भोपाल। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर की 6 नवंबर 2026 को प्रस्तावित कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रतियोगी परीक्षार्थियों ने आरक्षण रोस्टर और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए परीक्षा निरस्त करने की मांग की है। अभ्यर्थियों का दावा है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद मौजूदा रोस्टर की वैधानिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अभ्यर्थियों के मुताबिक, विश्वविद्यालय के विज्ञापन क्रमांक 33rd/2026-27/20, दिनांक 23 अप्रैल 2026 को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की गई है। याचिका क्रमांक WP No. 18011/2026 में 15 मई 2026 को नोटिस जारी होने का दावा किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने विज्ञापन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को आरक्षण नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताई है। यह मामला न्यायालय में लंबित बताया गया है।

OBC आरक्षण को लेकर भी आपत्ति

प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने 9 अक्टूबर 2026 को OBC आरक्षण को 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने संबंधी 2019 के अध्यादेश और संशोधन अधिनियम को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय का रोस्टर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के आधार पर तैयार किया गया था, इसलिए अब नए सिरे से रोस्टर बनाकर विज्ञापन जारी किया जाना चाहिए।

अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय के परिनियम Statute 6(1) का हवाला देते हुए चयन प्रक्रिया में CET के प्रावधान पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि संबंधित पदों पर चयन केवल अकादमिक स्कोर कार्ड के आधार पर होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने परीक्षा आयोजित करने के अधिकार को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है।

परीक्षा रद्द करने की मांग

अभ्यर्थियों ने कुलसचिव, कुलपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन देकर 6 नवंबर की परीक्षा निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने OBC के 14 प्रतिशत आरक्षण और EWS सहित नए रोस्टर के आधार पर नया विज्ञापन जारी करने की मांग रखी है।

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