एसीएस संजय दुबे बोले—16 अप्रैल के वीडियो प्रशिक्षण सत्र के, अनियमितता सिखाने के लिए नहीं; 146 अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई, सात बर्खास्त
भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में खरीदी और निविदा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने मामले में विभाग का पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 16 अप्रैल 2026 को आयोजित प्रशिक्षण सत्र के वीडियो का उद्देश्य अधिकारियों को अनियमितताएं करना सिखाना नहीं, बल्कि खरीदी और भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निगरानी व्यवस्था समझाना था।
दुबे के मुताबिक, अलग-अलग स्तरों के करीब 392 अधिकारी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। इनमें लगभग 135 मुख्य नगर पालिका अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अनियमितताओं की पहचान के लिए विभाग ई-नगरपालिका सॉफ्टवेयर, जेम पोर्टल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद ले रहा है।
पांच रुपये की खरीदी से करोड़ों के काम तक निगरानी
एसीएस ने बताया कि नगरीय निकायों में एक रुपये के भुगतान से लेकर करोड़ों रुपये के काम तक का रिकॉर्ड ई-नगरपालिका प्रणाली में रखा जाता है। खरीदी के लिए जेम पोर्टल का उपयोग अनिवार्य है। पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों का ई-नगरपालिका के रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है। इसके बाद एआई के जरिए अलग-अलग निकायों में एक ही सामग्री की खरीदी दरों की तुलना की जाती है। यह भी देखा जाता है कि कोई ठेकेदार अलग-अलग निकायों को समान सामग्री किस कीमत पर उपलब्ध करा रहा है। उनके अनुसार, विभाग में प्रतिदिन करीब 1,000 से 1,500 आदेश जारी होते हैं। इनमें छोटी सामग्री की खरीदी से लेकर 50 करोड़ और 500 करोड़ रुपये तक के काम शामिल हैं। इतने बड़े स्तर पर लेनदेन की जांच केवल कर्मचारियों के जरिए करना मुश्किल था, इसलिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था अपनाई गई।
सात कर्मचारी बर्खास्त, 80 से ज्यादा आपूर्तिकर्ताओं पर कार्रवाई
दुबे ने बताया कि प्रशिक्षण के समय तक 146 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी थी। इनमें सात को बर्खास्त किया गया था। अनियमित भुगतान के मामलों में करीब तीन से चार करोड़ रुपये की वसूली की गई। इसके अलावा गलत तरीके या दरों पर सामग्री उपलब्ध कराने के मामलों में 80 से अधिक ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।
मामलों के अनुसार, संबंधित लोगों से राशि वसूलने के साथ वेतनवृद्धि रोकने, पदावनति और बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई भी की गई। दुबे ने कहा कि विभाग का उद्देश्य नगरीय निकायों की आय और सरकारी अनुदान का इस्तेमाल नागरिकों की जरूरतों के लिए सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीदी और भुगतान की प्रक्रियाओं पर निगरानी जारी रहेगी तथा अनियमितता सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
