खुद की वसूली कमजोर, विकास के लिए 493 करोड़ का कर्ज लेगा निगम

1,334.76 करोड़ रुपये के संपत्तिकर और जलकर की मांग में से 224.80 करोड़ ही वसूले; पुराने बकाये की वसूली 4 फीसदी से भी कम

भोपाल। नगर निगम अपनी कर वसूली में पिछड़ रहा है, वहीं विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है। शनिवार को निगम परिषद ने अमृत योजना के तहत 493.49 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव पारित किया। दूसरी ओर, संपत्तिकर और जलकर के रूप में निगम को 1,334.76 करोड़ रुपये वसूलने हैं, लेकिन 13 अक्टूबर 2026 तक केवल 224.80 करोड़ रुपये ही वसूल हो पाए हैं। इस तरह 1,109.96 करोड़ रुपये की वसूली बाकी है।

निगम के आंकड़ों के मुताबिक, कुल मांग के मुकाबले अब तक करीब 16.84 प्रतिशत वसूली हुई है। सबसे चिंताजनक स्थिति पुराने बकाये की है। 922.59 करोड़ रुपये के पुराने बकाये में से केवल 36.66 करोड़ रुपये वसूल हुए हैं। यानी पुराने बकाये की वसूली महज 3.97 प्रतिशत है। ऐसे में कर्ज लेने के साथ ही बकाया करों की वसूली बढ़ाना निगम के सामने बड़ी चुनौती है।

संपत्तिकर की वसूली जलकर से बेहतर

13 अक्टूबर तक संपत्तिकर की कुल मांग 913.27 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 176.55 करोड़ रुपये वसूल हुए। इसकी वसूली दर 19.33 प्रतिशत रही। वहीं, जलकर की 421.49 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले 48.25 करोड़ रुपये ही मिले। जलकर की वसूली दर 11.45 प्रतिशत रही। दोनों करों में संपत्तिकर की तुलना में जलकर की वसूली कमजोर है।

चालू मांग के मामले में स्थिति पुराने बकाये से बेहतर है। संपत्तिकर और जलकर की कुल 412.16 करोड़ रुपये की चालू मांग में से 188.13 करोड़ रुपये वसूल हुए हैं। इसकी संयुक्त वसूली दर करीब 45.65 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट है कि निगम को पुराने बकायेदारों से वसूली करने में अधिक परेशानी हो रही है।

उत्तर विधानसभा क्षेत्र में वसूली सबसे कमजोर

विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों में उत्तर विधानसभा क्षेत्र की स्थिति कमजोर नजर आती है। यहां 124.84 करोड़ रुपये की संपत्तिकर मांग में से 9.40 करोड़ रुपये और 72.50 करोड़ रुपये की जलकर मांग में से केवल 4.11 करोड़ रुपये वसूल हुए।
इसके विपरीत, गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में संपत्तिकर की 223.70 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले 59.57 करोड़ रुपये वसूल हुए। यहां वसूली दर 26.63 प्रतिशत रही। जलकर में भी गोविंदपुरा की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर रही, जहां 52.95 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले 10.75 करोड़ रुपये मिले।

पिछले साल से 7.79 प्रतिशत ज्यादा वसूली

निगम की तुलनात्मक रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल से 13 अक्टूबर 2025 के बीच संबंधित मदों में 250.82 करोड़ रुपये वसूल हुए थे। इस साल इसी अवधि में यह राशि बढ़कर 270.37 करोड़ रुपये हो गई। यानी 19.55 करोड़ रुपये या 7.79 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, सभी क्षेत्रों में सुधार नहीं हुआ। मध्य विधानसभा क्षेत्र में कुल वसूली 36.62 करोड़ रुपये से घटकर 34.84 करोड़ रुपये रह गई। यह 1.78 करोड़ रुपये की गिरावट है। वार्डवार आंकड़ों में भी बड़ा अंतर दिखाई देता है। उत्तर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 13 में 53.14 करोड़ रुपये की संपत्तिकर मांग के मुकाबले केवल 69.69 लाख रुपये वसूल हुए। इसी वार्ड में 6.67 करोड़ रुपये की जलकर मांग के मुकाबले 36.42 लाख रुपये ही मिले।

कर्ज के साथ वसूली बढ़ाने की चुनौती:

निगम परिषद से कर्ज का प्रस्ताव पारित होने के बाद अब सवाल यह है कि निगम अपनी आय बढ़ाने और पुराने बकाये की वसूली के लिए क्या ठोस कदम उठाएगा। विकास योजनाओं के लिए कर्ज लेना एक ओर वित्तीय संसाधन जुटाने का रास्ता है, वहीं दूसरी ओर कमजोर कर वसूली निगम की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा सकती है।

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