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एम्स भोपाल में 2 से 4 अक्टूबर तक पेन फिजिशियन्स का राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

100 से अधिक विशेषज्ञ होंगे शामिल, 200 से ज्यादा युवा चिकित्सकों को मिलेगी आधुनिक दर्द उपचार की ट्रेनिंग

भोपाल। एम्स भोपाल में 2 से 4 अक्टूबर 2026 तक इंडियन सोसाइटी ऑफ पेन फिजिशियन्स का 12वां राष्ट्रीय एवं चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ISPPCON-2026 आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में भारत और विदेशों के 100 से अधिक विशेषज्ञ दर्द चिकित्सक शामिल होंगे। 2 अक्टूबर को होने वाली पूर्व-सम्मेलन कार्यशालाओं में देश के विभिन्न हिस्सों और दूरदराज के जिलों से आए 200 से अधिक युवा पेन फिजिशियन्स को उन्नत हस्तक्षेपी दर्द उपचार तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सम्मेलन में आधुनिक दर्द उपचार और नई तकनीकों पर विशेषज्ञ अपना अनुभव युवा चिकित्सकों के साथ साझा करेंगे। आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब कैंसर, मोटापा, घुटनों के गठिया, कमर दर्द और साइटिका जैसी समस्याओं के कारण दर्द प्रबंधन की जरूरत बढ़ रही है।

ओपिओइड के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी चर्चा

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में प्रभावी दर्द उपचार की आवश्यकता बढ़ रही है, लेकिन चिकित्सकीय मॉर्फिन की प्रति व्यक्ति खपत अभी भी कम है। वहीं, अमेरिका में फेंटानिल जैसे शक्तिशाली ओपिओइड के अनियंत्रित उपयोग से ओवरडोज का संकट गंभीर चुनौती बना हुआ है। ऐसे में सम्मेलन में ऐसे उपचार विकल्पों पर चर्चा होगी, जिनसे मरीजों को प्रभावी राहत मिले और अनावश्यक रूप से शक्तिशाली ओपिओइड पर निर्भरता न बढ़े।

कम चीरे वाली प्रक्रियाओं से उपचार

एम्स भोपाल की पेन मेडिसिन यूनिट में अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी तकनीकों की मदद से दर्द के वास्तविक स्रोत की पहचान कर न्यूनतम चीरा आधारित प्रक्रियाओं से उपचार किया जा रहा है। इससे आसपास के स्वस्थ हिस्सों पर प्रभाव कम होता है और कई मरीजों को बड़े ऑपरेशन से बचाया जा सकता है। अधिकांश प्रक्रियाओं में लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं पड़ती।

पेन मेडिसिन यूनिट के प्रभारी और सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. अनुज जैन ने कहा कि भारत में आने वाले वर्षों में दर्द उपचार की आवश्यकता तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि देश को अभी से सुरक्षित, प्रभावी और ओपिओइड पर कम निर्भरता वाले उपचार की क्षमता विकसित करनी होगी।

नौ साल में हजारों मरीजों का उपचार

एम्स भोपाल की पेन मेडिसिन यूनिट ने अपनी सेवाओं के नौ वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस दौरान ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, कैंसर के दर्द, घुटने के गठिया, फ्रोजन शोल्डर, कूल्हे के दर्द, कमर दर्द और साइटिका से पीड़ित हजारों मरीजों का न्यूनतम चीरा आधारित प्रक्रियाओं से उपचार किया गया है।

यूनिट ने रीढ़ की हड्डी में कैंसर फैलने के कारण फ्रैक्चर वाले मरीजों का भी उपचार किया है। ऐसी स्थिति में कीफोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाओं से कुछ मरीजों को दर्द से राहत मिलने और चलने-फिरने में मदद मिली है। इसी तरह लंबे समय से साइटिका से परेशान मरीजों को ट्रांसफोरामिनल न्यूनतम चीरा आधारित प्रक्रिया से राहत मिलने के उदाहरण भी यूनिट ने साझा किए हैं।

देश-विदेश के विशेषज्ञ होंगे शामिल

यह इंडियन सोसाइटी ऑफ पेन फिजिशियन्स का किसी एम्स द्वारा आयोजित पहला राष्ट्रीय सम्मेलन बताया गया है। इसमें एम्स नई दिल्ली, जिपमर, टाटा मेमोरियल, एसजीपीजीआई और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात से भी विशेषज्ञ चिकित्सकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

सम्मेलन को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग से मान्यता प्राप्त है और इसमें 8 सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) क्रेडिट घंटे उपलब्ध होंगे। आयोजन का उद्देश्य आधुनिक दर्द उपचार, न्यूनतम चीरा आधारित प्रक्रियाओं और सुरक्षित एवं प्रभावी दर्द प्रबंधन के क्षेत्र में चिकित्सकों की विशेषज्ञ क्षमता को मजबूत करना है।

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