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एम्स भोपाल में बढ़ेगी इलाज की सुविधाएं, नवंबर तक रोबोटिक सर्जरी; 30 नवंबर तक शुरू होगी PET-CT

भोपाल, 29 अगस्त। एम्स भोपाल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इलाज, जांच, डिजिटल सेवाओं और मरीजों की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। संस्थान में रोजाना करीब 6,000 से 7,000 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि विभिन्न विभागों में प्रतिदिन करीब 1,000 मरीज भर्ती हो रहे हैं। यह जानकारी एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेन्द्र कोतवाल (रि.) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

उन्होंने बताया कि संस्थान में कई अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू करने की तैयारी चल रही है। इनमें रोबोटिक सर्जरी, PET-CT, दूसरा MRI, दूसरा कैथ लैब, दूसरा LINAC और Gamma Knife प्रमुख हैं।

NIRF रैंकिंग में भी सुधार

एम्स भोपाल की राष्ट्रीय रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। चिकित्सा श्रेणी में NIRF 2025 में संस्थान को 25वां स्थान मिला है। 2024 में यह 31वें और 2023 में 38वें स्थान पर था। समग्र श्रेणी में एम्स भोपाल 101-150 के समूह में शामिल है।

3 हार्ट और 26 किडनी ट्रांसप्लांट

एम्स भोपाल में अब तक 3 हृदय और 26 गुर्दा प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। संस्थान के अनुसार हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम मध्य प्रदेश और मध्य भारत में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है। फेफड़ा प्रत्यारोपण की अनुमति मिल चुकी है और इसे जल्द शुरू करने की तैयारी है। वहीं लिवर ट्रांसप्लांट की दिशा में भी काम चल रहा है।

ट्रांसप्लांट सेवाओं को मजबूत करने के लिए समर्पित ट्रांसप्लांट ऑपरेशन थिएटर सुविधा भी विकसित की गई है।

₹75 हजार में IVF सुविधा

एम्स भोपाल में IVF सेंटर शुरू हो चुका है। यहां आधुनिक प्रजनन उपचार करीब 75 हजार रुपये की लागत पर उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत यह सुविधा जरूरतमंद दंपतियों के लिए अपेक्षाकृत किफायती विकल्प होगी।

WhatsApp से घर बैठे मिलेंगी कई सेवाएं

मरीजों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए अस्पताल आने से बचाने के लिए एम्स भोपाल ने WhatsApp आधारित 24 घंटे मरीज सेवा का सार्वजनिक बीटा संस्करण शुरू किया है। इसके जरिए मरीज घर से OPD अपॉइंटमेंट ले सकेंगे, लैब रिपोर्ट देख और डाउनलोड कर सकेंगे तथा डिस्चार्ज समरी प्राप्त कर सकेंगे। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र भी 72 घंटे में डाउनलोड किए जा सकेंगे।

अस्पताल को डिजिटल बनाने के लिए PACS प्रणाली की खरीद अंतिम चरण में है। इसके शुरू होने पर जांच की तस्वीरें और रिपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक रूप से सुरक्षित तरीके से देखी जा सकेंगी।

नवंबर तक शुरू हो सकती है रोबोटिक सर्जरी

एम्स भोपाल में दा विंची रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। स्थापना, प्रशिक्षण और जरूरी नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके नवंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है। इससे खासकर यूरोलॉजी सहित अन्य उपयुक्त विभागों में छोटे चीरे वाली सर्जरी की सुविधा बढ़ेगी।

30 नवंबर तक PET-CT, मार्च 2027 तक Gamma Knife

एम्स में PET-CT सुविधा 30 नवंबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है। इससे कैंसर की जांच और शरीर में बीमारी के फैलाव का पता लगाने में मदद मिलेगी। इसकी अनुमानित लागत करीब 7,500 रुपये बताई गई है।

वहीं Gamma Knife सुविधा मार्च 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है। इससे मस्तिष्क के कुछ ट्यूमर और अन्य संबंधित स्थितियों के लिए अत्यधिक सटीक रेडियोसर्जरी की सुविधा मिलेगी।

दूसरा MRI, कैथ लैब और LINAC

मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दूसरा 3 टेस्ला MRI और दूसरा कैथ लैब स्थापित किया जा रहा है। इससे जांच और हृदय संबंधी प्रक्रियाओं की क्षमता बढ़ेगी।

कैंसर उपचार के लिए दूसरा LINAC भी स्थापित किया जा रहा है। इससे रेडियोथेरेपी की क्षमता बढ़ने और मरीजों के प्रतीक्षा समय में कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा 200 बिस्तरों वाले समर्पित कैंसर केंद्र के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

पथरी के इलाज के लिए नई सुविधा

पथरी के मरीजों के लिए Extracorporeal Shock Wave Lithotripsy (ESWL) सुविधा स्थापित की जा रही है। मशीन अगले दो महीनों में लगने की उम्मीद है। इसके जरिए उपयुक्त मरीजों में बिना चीरा लगाए गुर्दे और मूत्र मार्ग की पथरी का उपचार किया जा सकेगा।

मरीजों के लिए पार्किंग और 700 बेड का विश्राम गृह

मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए नया पब्लिक पार्किंग परिसर तैयार हो चुका है, जिसका जल्द उद्घाटन किया जाएगा। इसके अलावा 700 बिस्तरों वाला विश्राम गृह निर्माणाधीन है और करीब डेढ़ वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है।

पार्किंग के ऊपर बहुविशेषता केंद्र बनाने की भी योजना है, जहां भोजन और बैंकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

IIT इंदौर के साथ मरीज मार्गदर्शन केंद्र

बड़े परिसर में मरीजों को सही विभाग तक पहुंचने में होने वाली परेशानी को कम करने के लिए एम्स भोपाल, IIT इंदौर के सहयोग से पायलट मरीज मार्गदर्शन केंद्र विकसित कर रहा है। यह केंद्र OPD, वार्ड, जांच केंद्र, प्रयोगशाला, दवा केंद्र सहित अन्य सुविधाओं तक पहुंचने में मरीजों की मदद करेगा।

इसके अलावा डॉक्टरों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नया आवासीय परिसर शुरू किया गया है। MBBS विद्यार्थियों के लिए खेल परिसर भी विकसित किया जा रहा है।

शोध और नवाचार पर भी जोर

एम्स भोपाल में चिकित्सा अनुसंधान पर भी जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में करीब 60 बाहरी वित्तपोषित शोध परियोजनाओं को अनुदान मिला। संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा हर साल करीब 450 शोध पत्र प्रकाशित किए जा रहे हैं। करीब 25 पेटेंट दाखिल या स्वीकृत हो चुके हैं।

कार्यकारी निदेशक डॉ. नरेन्द्र कोतवाल ने कहा कि एम्स भोपाल का लक्ष्य बढ़ती मरीज संख्या के अनुरूप चिकित्सा और जांच सुविधाओं का विस्तार करना है। आधुनिक तकनीक, शोध और मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मध्य प्रदेश और मध्य भारत के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं अधिक सुलभ और किफायती तरीके से उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है।

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