प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और निर्णय क्षमता बढ़ाने पर जोर; मरीजों को बेहतर सेवाएं देने में मिलेगी मदद
भोपाल। एम्स भोपाल में भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अधीन सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंधन संस्थान (आईएसटीएम), नई दिल्ली के सहयोग से संगठन-विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों तथा ग्रुप ‘बी’ और ‘सी’ अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्यों से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ने से इसका लाभ अस्पताल आने वाले मरीजों और आम नागरिकों को बेहतर, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाओं के रूप में मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम का शुभारंभ 7 सितंबर 2026 को एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेन्द्र कोतवाल (रि.) की उपस्थिति में हुआ। उन्होंने कहा कि नियमित प्रशिक्षण, नियमों की व्यावहारिक समझ, जवाबदेही और बेहतर निर्णय क्षमता प्रभावी प्रशासन के लिए जरूरी हैं। उन्होंने प्रशिक्षण को संस्थान की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण 7 से 9 सितंबर तक, जबकि ग्रुप ‘बी’ और ‘सी’ अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण 7 से 11 सितंबर तक आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में आचरण नियम, नेतृत्व एवं निर्णय-निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, सूचना का अधिकार अधिनियम, सुशासन, सतर्कता एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई, न्यायालयीन प्रकरण, कार्यालय प्रक्रिया, फाइल प्रबंधन, नोटिंग-ड्राफ्टिंग, सेवा मामलों में आरक्षण, सामान्य वित्तीय नियमावली (जीएफआर), सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम), पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ तथा सेवा-पुस्तिका के रखरखाव जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया।
आईएसटीएम के निदेशक एवं भारत सरकार के संयुक्त सचिव राजीव मांझी के साथ संयुक्त निदेशक दीपक कुमार बिष्ट, संयुक्त निदेशक गुंजन गांधी और उप निदेशक अनित शिशिर केरकेट्टा ने विषय-विशेषज्ञ के रूप में प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम में एम्स भोपाल के अधिष्ठाता (अनुसंधान), अधिष्ठाता (परीक्षा), चिकित्सा अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रशासनिक अधिकारी ज्ञानेंद्र प्रसाद ने किया।
एम्स प्रबंधन के अनुसार, प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमों एवं प्रक्रियाओं की बेहतर व्यावहारिक समझ देना तथा प्रशासनिक कार्यों में दक्षता, पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिकता बढ़ाना है। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण सत्रों में सक्रिय भागीदारी की और कार्यस्थल से जुड़ी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की।
