वर्मा ट्रेवल्स के पास करीब पांच हजार वर्गफीट परिसर में बसों की वर्कशॉप और पार्किंग; निगम ने भूमि उपयोग का किराया और कब्जे की पेनल्टी अब तक नहीं वसूली
भोपाल, 30 अक्टूबर। आईएसबीटी परिसर में नगर निगम की करीब पांच हजार वर्गफीट जमीन का वर्मा ट्रेवल्स द्वारा कथित तौर पर एक दशक से अधिक समय से अनाधिकृत उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। इस जगह पर ट्रेवल्स ने बसों की वर्कशॉप बना रखी थी और अनुपयोगी बसें भी खड़ी की जाती थीं। तीन दिन पहले इसी परिसर में आग लगने से चार बसें पूरी तरह जल गईं, जबकि चार अन्य बसों को भी नुकसान पहुंचा। घटना के बाद नगर निगम ने बस स्टैंड परिसर में गंदगी फैलाने के मामले में वर्मा ट्रेवल्स पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन निगम की जमीन का वर्षों से उपयोग करने के एवज में किराया या अनाधिकृत कब्जे की कोई पेनल्टी लगाने की कार्रवाई सामने नहीं आई है। सवाल यह है कि जब निगम की संपत्ति का उपयोग करने वालों से किराया वसूला जाता है और समय पर भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त राशि लगाई जाती है, तो इस मामले में अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
बीसीसीएल के लिए दी गई जगह का भी हो रहा उपयोग
नगर निगम ने पहले शहरी क्षेत्र में बसों के संचालन के लिए बीसीसीएल कंपनी को परिसर में जगह उपलब्ध कराई थी। बताया जा रहा है कि बीसीसीएल अब वहां कोई गतिविधि नहीं कर रही है और उस जगह का उपयोग भी वर्मा ट्रेवल्स द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में निगम की जमीन के वास्तविक उपयोग और उससे मिलने वाले राजस्व को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, बस स्टैंड परिसर में बस खड़ी करने का निर्धारित शुल्क करीब 40 रुपये बताया जाता है, लेकिन आरोप है कि वर्मा ट्रेवल्स द्वारा यह शुल्क भी नियमित रूप से जमा नहीं किया गया।
होर्डिंग पर 28 लाख का जुर्माना, यहां कार्रवाई क्यों नहीं?
नगर निगम ने कुछ माह पहले बिना अनुमति लगाए गए होर्डिंग के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे। इस कार्रवाई में एक प्रतिष्ठान पर 28 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बिना अनुमति विज्ञापन लगाने पर लाखों रुपये की वसूली की जा सकती है, तो निगम की करीब पांच हजार वर्गफीट जमीन का वर्षों तक उपयोग करने के मामले में किराया और जुर्माना क्यों नहीं लगाया गया? यदि निगम भूमि उपयोग की अवधि, निर्धारित दर और अनाधिकृत कब्जे के नियमों के अनुसार आकलन कर वसूली करता है, तो निगम को बड़ी राशि मिल सकती है। फिलहाल इस मामले में निगम की ओर से भूमि उपयोग शुल्क और संभावित बकाया वसूली को लेकर कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
