अब राशन भी गांव में, रोजगार भी गांव में: 7.13 लाख जनजातीय परिवारों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम’ योजना से दूर दुकान तक जाने की परेशानी होगी खत्म, स्थानीय युवाओं को मिला स्वरोजगार का अवसर
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों के परिवारों को गांव में ही राशन उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल की है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश के 20 जिलों के 89 अनुसूचित जनजाति विकासखंडों में ‘मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम’ योजना लागू की गई है।
योजना के तहत उचित मूल्य की दुकानों से जुड़े आश्रित गांवों तक राशन सामग्री वाहनों के माध्यम से पहुंचाई जा रही है। इससे 6,575 आश्रित गांवों के करीब 7 लाख 13 हजार परिवारों को गांव में ही राशन मिलने का लाभ मिलेगा।
दूर स्थित राशन दुकानों तक जाने की परेशानी होगी खत्म
जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में कई गांवों से उचित मूल्य की दुकान काफी दूर होती है। राशन लेने के लिए लोगों को समय और पैसा खर्च करने के साथ कई बार मजदूरी भी छोड़नी पड़ती थी। अब राशन सामग्री सीधे आश्रित गांवों तक पहुंचाई जा रही है। इससे हितग्राहियों को अपने गांव में ही राशन मिल सकेगा और उनके समय, श्रम तथा मजदूरी की बचत होगी।
472 सेक्टर में परिवहन व्यवस्था
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार राशन परिवहन के लिए प्रदेश में 472 सेक्टर बनाए गए हैं। इन सेक्टरों के अंतर्गत आने वाले गांवों तक राशन पहुंचाने के लिए अनुसूचित जनजाति वर्ग के चयनित हितग्राहियों को बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराकर वाहन दिए गए हैं।
जनजातीय युवाओं को मिला स्वरोजगार
योजना की खास बात यह है कि राशन परिवहन की जिम्मेदारी स्थानीय जनजातीय युवाओं को दी जा रही है। वाहन खरीदने के लिए चयनित हितग्राहियों को सरकार की ओर से 2 से 3 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी उपलब्ध कराई गई है। इससे युवाओं को अपना रोजगार शुरू करने का अवसर मिला है।
योजना के तहत एक टन क्षमता वाले वाहन के लिए 24 हजार रुपये और दो टन क्षमता वाले वाहन के लिए 31 हजार रुपये मासिक किराया दिया जा रहा है। इससे वाहन संचालकों को नियमित आय का अवसर मिल रहा है।
राशन के साथ रोजगार पर भी जोर
‘मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम’ योजना का उद्देश्य केवल राशन वितरण को आसान बनाना नहीं है। इसके माध्यम से जनजातीय परिवारों को गांव में सुविधा देने के साथ स्थानीय युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया गया है।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि गांव में राशन पहुंचने से पात्र परिवारों की मजदूरी, समय और श्रम की बचत होगी। वहीं परिवहन व्यवस्था से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इस तरह योजना जनजातीय क्षेत्रों में सुविधा, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण को एक साथ बढ़ावा देने का माध्यम बन रही है।





