सिकल सेल से पीड़ित बच्चों में ‘छिपी’ बीमारियों का बड़ा खुलासा, एम्स भोपाल के शोध ने बढ़ाई डॉक्टरों की चिंता

भोपाल स्थित AIIMS Bhopal के शोधकर्ताओं ने सिकल सेल रोग से पीड़ित बच्चों में ऐसी गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का पता लगाया है, जो सामान्य जांच में अक्सर सामने नहीं आतीं। अध्ययन में हृदय, नींद और किडनी से जुड़ी कई “साइलेंट” समस्याओं की पहचान हुई है, जिससे यह संकेत मिला है कि सिकल सेल रोग केवल रक्त संबंधी बीमारी नहीं, बल्कि बहु-अंगों को प्रभावित करने वाली जटिल स्थिति बन चुका है।
यह शोध संस्थान के पीडियाट्रिक्स विभाग और पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी एवं हाइपरटेंशन डिवीजन द्वारा किया गया और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी जर्नल में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन एमडी शोधकार्य के तहत Dr. Harshita S. ने Dr. Girish Chandra Bhatt के मार्गदर्शन में किया।
सिकल सेल रोग: केवल खून की बीमारी नहीं
सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय दरांती (सिकल) जैसी हो जाती हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है और समय के साथ रक्तवाहिकाओं, हृदय, फेफड़ों तथा किडनी पर असर पड़ने लगता है।
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों की जनजातीय आबादी में यह बीमारी अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है। बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के कारण अब सिकल सेल से पीड़ित बच्चे अधिक समय तक जीवित रह रहे हैं, लेकिन इसके साथ दीर्घकालिक अंग क्षति का खतरा भी बढ़ रहा है।
सामान्य ब्लड प्रेशर रिपोर्ट के पीछे छिपा खतरा
अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष 24 घंटे की एम्बुलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग (ABPM) से जुड़ा रहा। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई बच्चों का अस्पताल में जांच के दौरान ब्लड प्रेशर सामान्य दिखाई दिया, लेकिन 24 घंटे की निगरानी में “मास्क्ड हाइपरटेंशन” और रात के समय असामान्य रक्तचाप जैसी गंभीर स्थितियां सामने आईं।
लगभग दो-तिहाई बच्चों में रात के दौरान रक्तचाप का पैटर्न असामान्य पाया गया। यह स्थिति भविष्य में स्ट्रोक, हृदय रोग और किडनी क्षति का जोखिम बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सामान्य ओपीडी जांच के आधार पर इन बच्चों की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति का आकलन संभव नहीं है।
नींद में सांस रुकने की समस्या से बढ़ रहा हृदय जोखिम
शोध में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) की उच्च दर भी सामने आई। यह ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है। अध्ययन के अनुसार, जिन बच्चों में स्लीप एपनिया पाया गया, उनमें हीमोग्लोबिन का स्तर कम और रक्तवाहिकाओं की क्षति अधिक थी।
डॉक्टरों ने इन बच्चों में कैरोटिड आर्टरी की मोटाई बढ़ने और हृदय के लेफ्ट वेंट्रिकल पर अतिरिक्त दबाव के संकेत भी दर्ज किए। यह भविष्य में हृदय रोग विकसित होने का प्रारंभिक संकेत माना जाता है।
71 प्रतिशत बच्चों में प्रारंभिक अंग क्षति के संकेत
अध्ययन में सबसे चिंताजनक तथ्य यह सामने आया कि लगभग 71 प्रतिशत बच्चों में प्रारंभिक हृदय और रक्तवाहिका क्षति के संकेत मौजूद थे। इनमें लेफ्ट वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी, एंडोथेलियल डिसफंक्शन और कैरोटिड इंटिमा-मीडिया थिकनेस जैसी समस्याएं शामिल थीं।
विशेष बात यह रही कि कई बच्चों में हाईपरटेंशन स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं था, फिर भी अंगों की क्षति शुरू हो चुकी थी। इससे संकेत मिलता है कि सिकल सेल रोग में रक्तवाहिकाओं पर असर बहुत प्रारंभिक अवस्था में शुरू हो सकता है।
किडनी जांच में सामने आई छिपी समस्याएं
शोधकर्ताओं ने पाया कि लगभग एक-तिहाई बच्चों में प्रोटीन्यूरिया मौजूद था, जो किडनी क्षति का शुरुआती संकेत माना जाता है। इसके अलावा सिस्टेटिन-सी आधारित eGFR जांच में 61 प्रतिशत बच्चों की किडनी कार्यक्षमता प्रभावित मिली।
दिलचस्प तथ्य यह रहा कि सामान्य क्रिएटिनिन जांच की तुलना में सिस्टेटिन-सी टेस्ट अधिक संवेदनशील साबित हुआ। इसका अर्थ है कि पारंपरिक जांच कई बार शुरुआती किडनी क्षति को पकड़ नहीं पातीं।
जनजातीय क्षेत्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन
भारत सरकार पहले ही सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन चला रही है। ऐसे में एम्स भोपाल का यह अध्ययन नीति निर्माताओं और चिकित्सकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है कि केवल रक्त संक्रमण और दर्द प्रबंधन पर्याप्त नहीं हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिकल सेल से पीड़ित बच्चों के लिए नियमित ABPM, स्लीप स्टडी, हृदय जांच और उन्नत किडनी स्क्रीनिंग को भी उपचार प्रोटोकॉल का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इससे अंगों की क्षति को शुरुआती चरण में पहचानकर गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।
Dr. Girish Chandra Bhatt के अनुसार, यह अध्ययन सिकल सेल रोग के उपचार में “मल्टी-डिसिप्लिनरी केयर मॉडल” की आवश्यकता को मजबूत करता है, जहां बाल रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ, नेफ्रोलॉजिस्ट और स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ मिलकर दीर्घकालिक देखभाल सुनिश्चित करें।

