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नाबार्ड के सहयोग से मध्यप्रदेश के चार पारंपरिक उत्पादों को मिला जीआई टैग, शिल्पकारों को मिलेगा वैश्विक बाजार

भोपाल। मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। प्रदेश के चार विशिष्ट उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया गया है। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) ने वित्तीय सहयोग, तकनीकी मार्गदर्शन और संबंधित शिल्पकार समूहों के साथ समन्वय स्थापित कर अहम भूमिका निभाई।

जीआई टैग प्राप्त करने वाले उत्पादों में प्रदेश की कला, संस्कृति और पारंपरिक कौशल की अनूठी झलक देखने को मिलती है।

मध्यप्रदेश के चार उत्पादों को मिला जीआई टैग

खजुराहो मेटल क्राफ्ट (जिला छतरपुर) — आवेदन संख्या 1363

मालवा पेंटिंग (मालवा क्षेत्र, जिला धार) — आवेदन संख्या 1364

सारंगपुर हैंडलूम साड़ी एवं फैब्रिक्स (जिला राजगढ़) — आवेदन संख्या 1366

भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट (भोपाल) — आवेदन संख्या 1368


इन उत्पादों को जीआई पहचान मिलने से अब उनकी भौगोलिक विशिष्टता और पारंपरिक महत्व को आधिकारिक संरक्षण प्राप्त होगा।

पारंपरिक कला को मिलेगा बाजार और नई पहचान

नाबार्ड ने इन उत्पादों के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया में शिल्पकारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया। संस्था ने वित्तीय सहायता के साथ-साथ तकनीकी मार्गदर्शन दिया और शिल्पकार समूहों एवं संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की सदियों पुरानी कला और शिल्प परंपराओं को संरक्षित करना तथा इन्हें बड़े बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

जीआई टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की ब्रांड पहचान मजबूत होगी, नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और देश-विदेश के बाजारों में इनकी मांग एवं मूल्य बढ़ने की संभावना है।

शिल्पकारों, विशेषकर महिला कारीगरों को मिलेगा लाभ

मध्यप्रदेश के ये उत्पाद केवल हस्तकला नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। खजुराहो का उत्कृष्ट धातु शिल्प, मालवा की पारंपरिक चित्रकला, सारंगपुर की हथकरघा साड़ियां और भोपाली बटुआ एवं जरी कार्य अपनी अलग पहचान रखते हैं।

जीआई टैग से स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पादों की बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा और विशेष रूप से महिला शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में सहायता मिलेगी।

विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से मिली सफलता

इन जीआई पंजीकरणों की सफलता में मध्यप्रदेश शासन के एमएसएमई विभाग और जीआई विशेषज्ञ के रूप में प्रसिद्ध श्री रजनीकांत के तकनीकी मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

नाबार्ड ने कहा कि ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना, पारंपरिक विरासत का संरक्षण करना और समावेशी आर्थिक विकास को गति देना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। संस्था भविष्य में भी प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, ग्रामीण कारीगरों और उद्यमियों को बाजार से जोड़ने के प्रयास जारी रखेगी।

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