Business

स्मार्ट सिटी प्लानिंग में जंगल, कृषि भूमि और वेटलैंड बचाना जरूरी : हफीज कॉन्ट्रैक्टर

शहरों के विकास के लिए 2D नहीं, 3D प्लानिंग पर जोर; प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखकर हो निर्माण

पुणे, 13 सितंबर। पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरों में नई आबादी को बसाने के लिए जंगल, कृषि भूमि और आर्द्रभूमि (वेटलैंड) को नुकसान पहुंचाना अब संभव नहीं है। स्मार्ट सिटी प्लानिंग में पर्यावरण संरक्षण के साथ हाई-डेंसिटी और त्रिआयामी (3D) निर्माण पद्धतियों पर ध्यान देना होगा।

वे एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU), पुणे में आयोजित ‘हफीज कॉन्ट्रैक्टर स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर’ के उद्घाटन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में फाइन ज्वैलर पवन आनंद और वास्तुकार पुष्कर कानविंदे विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। सम्मेलन में वास्तुकला, डिजाइन, उद्योग और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए।

कॉन्ट्रैक्टर ने कहा कि उनके नाम से जुड़े आर्किटेक्चर संस्थान से जुड़ना बड़ी जिम्मेदारी है। छात्रों को वास्तुकला के मूल सिद्धांतों को समझने के साथ यह भी सीखना चाहिए कि उनके हर निर्माण के पीछे कोई उद्देश्य होना चाहिए। शहरों के लगातार विस्तार को देखते हुए निर्माण और शहरी नियोजन के पुराने तरीकों पर फिर से विचार करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि शहरों के विस्तार के नाम पर कृषि भूमि और जंगलों को नष्ट करने का सिलसिला जारी नहीं रह सकता। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से मानव अस्तित्व पर संकट आ सकता है। इसलिए शहरों को केवल दो आयामों में नहीं, बल्कि 3D तरीके से डिजाइन करना होगा। अधिक लोगों को कम क्षेत्र में सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए हाई-डेंसिटी निर्माण पर विचार जरूरी है। साथ ही इमारतों को भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सीमेंट और स्टील निर्माण की बुनियादी सामग्री हैं, लेकिन मजबूत और सुरक्षित इमारतों के लिए इनमें भी सुधार की आवश्यकता है। शहरों की आज की डिजाइनिंग आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को प्रभावित करेगी। इसलिए संस्थानों को नए विचारों और प्रयोगों को बढ़ावा देना चाहिए।

तकनीक के साथ बदलेगी वास्तुकला शिक्षा

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा कि हफीज कॉन्ट्रैक्टर का संस्थान से जुड़ना सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण सीखने और काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऐसे में उद्योग और शिक्षा जगत को मिलकर विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करना होगा।

पवन आनंद ने छात्रों से अपनी रचनात्मकता को किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि वास्तुकला से लेकर ज्वैलरी डिजाइन तक का अनुभव बताता है कि रचनात्मकता की कोई सीमा नहीं होती। वहीं पुष्कर कानविंदे ने कहा कि पांच साल की पढ़ाई पूरी होने के बाद सीखना बंद नहीं होता। एक बेहतर वास्तुकार बनने के लिए जीवनभर सीखते रहना जरूरी है। AI जैसी तकनीक के दौर में भी मानवीय रचनात्मकता को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।

सम्मेलन में ‘सस्टेनेबिलिटी (SDGs) और वास्तुकला शिक्षा का भविष्य’ तथा ‘प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप और बी.आर्च. छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना’ विषयों पर राउंड-टेबल चर्चा हुई। इनमें सतत विकास लक्ष्यों को वास्तुकला शिक्षा से जोड़ने, पर्यावरणीय चुनौतियों और तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। विद्यार्थियों ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से विशेषज्ञों से सीधे संवाद भी किया।

Related Articles