एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के दीक्षांत समारोह में 7,806 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 345 मेधावी छात्रों का सम्मान
पुणे, 26 अक्टूबर। तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना, नौकरी पाना या सफल करियर बनाना नहीं है। शिक्षा से व्यक्ति में अनुशासन, समर्पण और चरित्र का विकास होना चाहिए। चरित्रवान नागरिक ही राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे रविवार को पुणे स्थित एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी-डब्ल्यूपीयू) के आठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। वे समारोह के मुख्य अतिथि थे।
राज्यपाल ने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में है। उनके ज्ञान, कौशल और अनुभव का लाभ समाज तथा देश को मिलना चाहिए। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रत्येक युवा को यह सोचना होगा कि वह देश के विकास में किस तरह योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज के हित में भी किया जाए।
7,806 विद्यार्थियों को मिली उपाधि
दीक्षांत समारोह में 17 पीएचडी शोधार्थियों सहित कुल 7,806 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 345 विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया गया। इनमें 135 स्वर्ण, 105 रजत और 105 कांस्य पदक शामिल हैं। स्कूल ऑफ साइंस एंड एनवायरनमेंटल स्टडीज की धनश्री राजेंद्र म्हसे को उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि के लिए फाउंडर प्रेसिडेंट मेडल प्रदान किया गया।
ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें युवा
समारोह के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने कहा कि शिक्षा के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी है। विद्यार्थियों को अपने पेशे में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और उत्कृष्टता के मूल्यों को बनाए रखना चाहिए। अपने ज्ञान और कौशल से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।
हरियाणा सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. अशोक खेमका ने कहा कि डिग्री हासिल करना जिम्मेदारी की शुरुआत है। युवाओं को बदलती तकनीक और प्रतिस्पर्धा के बीच रचनात्मकता, नए प्रयोग करने का साहस और ईमानदारी बनाए रखनी चाहिए।
विश्वविद्यालय के मानद कुलाधिपति एवं यूनिवर्सिटी एट बफेलो, अमेरिका के अध्यक्ष प्रो. डॉ. सतीश के. त्रिपाठी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से अपने ज्ञान और रचनात्मकता का उपयोग नैतिक मूल्यों तथा जनकल्याण को बढ़ावा देने के लिए करने का आह्वान किया।
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल वी. कराड ने कहा कि विद्यार्थियों की जिम्मेदारी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है। विज्ञान, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों के समन्वय से अधिक शांतिपूर्ण और जिम्मेदार दुनिया के निर्माण में योगदान देना आवश्यक है।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) रविराजा एन. सीताराम सहित विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
