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11 जोनों में लापरवाही पर निगमायुक्त का चाबुक, दो दर्जन से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों का वेतन रोकने के निर्देश

भोपाल। नगर निगम भोपाल में राजस्व वसूली की धीमी रफ्तार, सीएम हेल्पलाइन एवं निगम स्तर की लंबित शिकायतों के निराकरण में लापरवाही और यांत्रिक व सीवेज विभाग के कार्यों में लगातार बरती जा रही ढिलाई पर निगमायुक्त संस्कृति जैन ने कड़ा रुख अपनाया है। समय-सीमा से जुड़े कार्यों की समीक्षा बैठक में उन्होंने 11 जोनों के दो दर्जन से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए हैं। इस कार्रवाई से निगम के विभिन्न विभागों में हड़कंप मच गया है।

समीक्षा बैठक में निगमायुक्त ने स्पष्ट कहा कि राजस्व वसूली में लापरवाही का सीधा असर नगर निगम की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इससे विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है और कर्मचारियों के वेतन भुगतान जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों, जोनल अधिकारियों, इंजीनियरों और वार्ड प्रभारियों को तत्काल कार्यप्रणाली में सुधार लाने तथा निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

निगमायुक्त संस्कृति जैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तय समय-सीमा में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो कार्रवाई केवल वेतन रोकने तक सीमित नहीं रहेगी। जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ और अधिक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में मानसून की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। निगमायुक्त ने फील्ड अमले को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश देते हुए कहा कि नालों और नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। जलभराव संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाए तथा सड़कों की स्थिति पर विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि बारिश के दौरान कहीं भी जलभराव, सीवेज ओवरफ्लो या गंदे पानी की समस्या उत्पन्न न हो।

गौरतलब है कि इससे पहले भी नगर निगम प्रशासन ने शून्य राजस्व वसूली करने वाले 29 वार्ड प्रभारियों का सात दिन का वेतन काटने की कार्रवाई की थी। इसके बावजूद वसूली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। यही वजह है कि निगम प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए वेतन रोकने जैसे कड़े कदम उठाए हैं। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि नागरिक सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता अब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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