स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर, नियमितिकरण और समान वेतन समेत कई मांगें लंबित
भोपाल । मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत करीब 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ म.प्र. के इस फैसले से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी ही विभिन्न योजनाओं का संचालन करते हैं।
संघ का कहना है कि कोविड काल से लेकर नियमित स्वास्थ्य सेवाओं तक, संविदा कर्मचारियों ने लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टीकाकरण अभियान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं और ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं का बड़ा हिस्सा इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे संचालित होता है। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों और वेतन संबंधी मांगों पर अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
संघ से जुड़ी डॉ. कामिनी मेहरा के अनुसार, सरकार स्तर पर पूर्व में मांगों को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष गुजरने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी है। संगठन का आरोप है कि संविदा कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों के समान कार्य लिया जाता है, लेकिन वेतन, भत्तों और सामाजिक सुरक्षा के मामलों में उन्हें समान अधिकार नहीं मिलते।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने जिन मांगों को प्रमुखता से उठाया है, उनमें नियमितिकरण सबसे अहम है। इसके अलावा कर्मचारियों ने राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS), स्वास्थ्य बीमा सुविधा, प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता, वेतन विसंगति दूर करने और नियमित कर्मचारियों की तरह अवकाश सुविधा की मांग की है।
संगठन ने “समान कार्य के लिए समान वेतन” की मांग को भी प्रमुख मुद्दा बनाया है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि (PBI) को मूल वेतन में समायोजित करने की मांग उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान वेतन संरचना महंगाई और बढ़ते कार्यभार के अनुपात में पर्याप्त नहीं है।
चरणबद्ध आंदोलन की पूरी रूपरेखा
संघ द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन कई चरणों में संचालित किया जाएगा—
25 से 27 मई तक कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
28 और 29 मई को कलेक्टर, सीएमएचओ और बीएमओ को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
30 मई से 1 जून तक सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को ज्ञापन देकर समर्थन मांगा जाएगा।
2 जून से ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, टीकाकरण अभियान और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। मध्यप्रदेश के दूरस्थ जिलों में संविदा कर्मचारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां डॉक्टरों और स्थायी स्टाफ की कमी पहले से बनी हुई है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र भदौरिया, प्रदेश संयोजक विजय ठक्कर और प्रदेश महामंत्री जितेंद्र यदुवंशी ने सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो स्वास्थ्य सेवाओं में आने वाले व्यवधान की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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