डोडाचूरा से गांजा तक, बदलते तस्करी नेटवर्क ने पुलिस के सामने खड़ी की नई चुनौती
Bhopal. Madhya Pradesh में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रहा अभियान अब केवल छोटे स्तर की बरामदगी तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले दो दिनों में प्रदेश के कई जिलों में हुई कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि ड्रग तस्करी का नेटवर्क अब ग्रामीण मार्गों, मालवाहक वाहनों और सामान्य व्यापारिक पैकेजिंग का इस्तेमाल कर अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
Mandsaur, Umaria, Katni, Maihar और Sagar में पुलिस द्वारा की गई अलग-अलग कार्रवाई में भारी मात्रा में डोडाचूरा और गांजा जब्त किया गया। इन मामलों में तस्करी के तौर-तरीके भी अलग-अलग पाए गए—कहीं सब्जियों के नीचे मादक पदार्थ छिपाए गए, तो कहीं साड़ियों की पैकिंग को आवरण बनाया गया।
सबसे बड़ी बरामदगी मंदसौर में, अफीम बेल्ट फिर चर्चा में
मंदसौर जिले की गरोठ थाना पुलिस ने एक पिकअप वाहन से 324 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा जब्त किया। यह खेप सब्जियों के नीचे छिपाकर ले जाई जा रही थी। पुलिस ने वाहन और मोबाइल फोन सहित लाखों रुपये की संपत्ति जब्त की है।
मंदसौर लंबे समय से देश की अफीम उत्पादक बेल्ट का हिस्सा माना जाता है। हालांकि वैध अफीम खेती केंद्र सरकार के लाइसेंस के तहत नियंत्रित होती है, लेकिन डोडाचूरा की अवैध तस्करी वर्षों से कानून-व्यवस्था एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैध उत्पादन क्षेत्रों के आसपास अवैध नेटवर्क तेजी से सक्रिय हो जाते हैं क्योंकि यहां कच्चे माल की उपलब्धता अपेक्षाकृत आसान होती है।
उमरिया में हादसे ने खोला तस्करी का राज
उमरिया जिले में अमरपुर चौकी पुलिस को एक दुर्घटनाग्रस्त वाहन से 62 किलो से अधिक गांजा मिला। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि वाहन दुर्घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। इस कार्रवाई में करीब 22.5 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि तस्कर अब लंबी दूरी के परिवहन में छोटे शहरों और वन क्षेत्रों से गुजरने वाले मार्गों का उपयोग अधिक कर रहे हैं ताकि मुख्य हाईवे पर निगरानी से बचा जा सके।
कटनी और मैहर में पैकेजिंग के जरिए तस्करी
कटनी में एनकेजे थाना पुलिस ने साड़ियों की पैकिंग के भीतर छिपाकर ले जाया जा रहा 15 किलो से अधिक गांजा बरामद किया। वहीं मैहर में “ऑपरेशन प्रहार 2.0” के तहत कोतवाली पुलिस ने संदिग्ध कार से 21 किलो से ज्यादा गांजा जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इन मामलों ने यह स्पष्ट किया है कि तस्कर अब सामान्य कारोबारी गतिविधियों की आड़ लेकर मादक पदार्थों की सप्लाई चेन तैयार कर रहे हैं। जांच एजेंसियों के लिए यह चुनौती इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि परिवहन के लिए उपयोग किए जा रहे तरीके लगातार बदल रहे हैं।
सागर में महिला आरोपी की गिरफ्तारी क्या संकेत देती है?
सागर जिले के राहतगढ़ थाना क्षेत्र में पुलिस ने 4 किलो से अधिक गांजा और परिवहन में इस्तेमाल ऑटो वाहन जब्त किया। इस मामले में एक महिला सहित दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में ड्रग नेटवर्क में महिलाओं और स्थानीय स्तर के छोटे कैरियर्स की भागीदारी बढ़ी है। इसका उद्देश्य पुलिस की प्रारंभिक शंका से बचना और छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए सप्लाई बनाए रखना होता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
मध्यप्रदेश भौगोलिक रूप से उत्तर भारत, पश्चिम भारत और पूर्वी राज्यों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर बन चुका है। यही कारण है कि गांजा, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स की आवाजाही में राज्य की भूमिका बढ़ी है। विशेष रूप से छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तरप्रदेश से जुड़े मार्गों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बरामदगी और गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी। पुलिस को अब वित्तीय जांच, सप्लाई नेटवर्क, डिजिटल भुगतान चैन और अंतरराज्यीय कनेक्शन पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। कई मामलों में स्थानीय स्तर के आरोपी केवल “कैरियर” होते हैं, जबकि असली नेटवर्क पर्दे के पीछे सक्रिय रहता है।
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