स्वाधीनता के गान’ में गूंजा देशभक्ति का स्वर, रवीन्द्र भवन में कविता, संगीत और नृत्य से सजी आजादी की गाथा
आरएनटीयू, विश्वरंग फाउंडेशन और एसजीएसयू की प्रस्तुति में ‘वंदे मातरम्’ के साथ लहराए तिरंगे, ‘स्वाधीनता के गान’ पुस्तक का भी हुआ लोकार्पण
भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू), विश्वरंग फाउंडेशन और एसजीएसयू के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार शाम रवीन्द्र भवन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘स्वाधीनता के गान’ ने देशभक्ति के रंगों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कविता, संगीत और कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की गाथा जीवंत हुई। कार्यक्रम के समापन पर ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तिरंगे लहराकर राष्ट्रभक्ति का उत्साह व्यक्त किया।
हिंदी पत्रकारिता की दो सदी पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस विशेष प्रस्तुति में वरिष्ठ साहित्यकार संतोष चौबे की परिकल्पना, कथक नृत्यांगना क्षमा मालवीय का नृत्य संयोजन, संतोष कौशिक और राजू राव का संगीत तथा कला समीक्षक विनय उपाध्याय के प्रभावशाली कथन ने कार्यक्रम को विशेष आयाम दिया। पुरू कथक नृत्य अकादमी की 75 से अधिक नृत्यांगनाओं ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुभद्रा कुमारी चौहान, माखनलाल चतुर्वेदी, रामधारी सिंह दिनकर, महादेवी वर्मा सहित अनेक महान कवियों की देशभक्ति रचनाओं को संगीत और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति का संदेश था कि स्वतंत्रता केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और राष्ट्रीय चेतना की जीवंत विरासत है।
अपने संबोधन में आरएनटीयू के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि आज आवश्यकता है उन ओजस्वी कविताओं और साहित्यकारों को याद करने की, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमानस में आत्मजागृति का संचार किया। उन्होंने कहा कि ‘स्वाधीनता के गान’ युवा पीढ़ी में साहित्य, राष्ट्रप्रेम और शब्द की शक्ति के प्रति विश्वास जगाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस अवसर पर आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘स्वाधीनता के गान’ का भी लोकार्पण किया गया। पुस्तक में हिंदी के 34 कवियों की 50 से अधिक देशभक्ति कविताओं का संकलन किया गया है। इसका संपादन साहित्यकार श्रीराम परिहार और रामवल्लभ आचार्य ने किया है, जबकि परामर्श संतोष चौबे और समन्वय विनय उपाध्याय ने किया।