कजलीखेड़ा में सड़क चौड़ीकरण कार्रवाई का विरोध, मकान खाली कराने पहुंची राजस्व टीम को लौटना पड़ा

विस्थापन की व्यवस्था नहीं होने पर ग्रामीणों का विरोध, खाली मकानों पर चला बुलडोजर
भोपाल, 4 जून। राजधानी भोपाल की कोलार तहसील स्थित ग्राम कजलीखेड़ा में गुरुवार को सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को स्थानीय रहवासियों के विरोध का सामना करना पड़ा। प्रशासन द्वारा पूर्व में नोटिस जारी किए जाने के बावजूद प्रभावित परिवारों ने अपने मकान खाली नहीं किए, जिसके चलते मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। विरोध के बीच प्रशासन केवल खाली पड़े मकानों पर ही कार्रवाई कर सका और बाद में टीम को वापस लौटना पड़ा।
महिलाओं और बच्चों के साथ सड़क पर उतरे ग्रामीण
सड़क निर्माण एवं चौड़ीकरण कार्य के लिए चिन्हित मकानों को हटाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग, नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी दस्ते और भारी पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अधिकारी कजलीखेड़ा पहुंचे थे। जैसे ही बुलडोजर से कार्रवाई शुरू करने की कोशिश हुई, ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे अपने परिवारों के साथ घरों के सामने आकर खड़े हो गए।
ग्रामीणों का कहना था कि वे विकास कार्यों का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन जब तक उनके पुनर्वास और विस्थापन की समुचित व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे अपने मकान नहीं छोड़ेंगे। लोगों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें ऐसी जगह स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दे रहा है जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
खाली पड़े करीब आधा दर्जन मकानों पर हुई कार्रवाई
स्थिति को नियंत्रित करने और लोगों को समझाने का प्रयास प्रशासनिक अधिकारियों ने किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद प्रशासन ने केवल उन मकानों पर बुलडोजर चलाया जो पहले से खाली पड़े थे। बताया जा रहा है कि करीब आधा दर्जन खाली मकानों को हटाया गया। विरोध को देखते हुए प्रशासन ने आगे की कार्रवाई फिलहाल स्थगित कर दी और टीम वापस लौट गई।
कार्रवाई के दौरान कोलार तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक (आरआई), पटवारी सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
मंगलवार को कलेक्टर से मिल चुके थे प्रभावित परिवार
सड़क निर्माण परियोजना से प्रभावित कजलीखेड़ा क्षेत्र के करीब 60 झुग्गी और मकान प्रभावित बताए जा रहे हैं। इससे पहले मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान लगभग 15 महिला और पुरुष रहवासियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखी थीं।
ग्रामीणों का आरोप था कि उन्हें शहर से दूर एक पहाड़ी क्षेत्र में बसाने की बात कही जा रही है, जहां पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से उचित पुनर्वास की मांग की थी, लेकिन उनका कहना है कि अब तक कोई संतोषजनक व्यवस्था नहीं की गई है।
प्रशासन का पक्ष
इस मामले में एसडीएम पी.सी. पांडेय ने कहा कि क्षेत्र में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है। प्रभावित लोगों को नियमानुसार स्वयं मकान हटाने के लिए पहले ही सूचित किया जा चुका है। प्रशासन कानून और नियमों के तहत कार्रवाई कर रहा है तथा विकास कार्यों को समय पर पूरा करना आवश्यक है।
विकास बनाम पुनर्वास का सवाल
कजलीखेड़ा की घटना ने एक बार फिर विकास परियोजनाओं और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे सड़क निर्माण का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि सम्मानजनक और सुविधायुक्त पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दे रहा है।



