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30 हजार सीड बॉल्स का लक्ष्य: पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में एम्स भोपाल की नई पहल

भोपाल। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते शहरीकरण और घटते हरित क्षेत्र आज केवल पर्यावरणीय चिंता का विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी सीधे तौर पर जुड़े मुद्दे बन चुके हैं। ऐसे समय में स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका केवल उपचार और चिकित्सा सेवाओं तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि उन्हें समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करना पड़ता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए एम्स भोपाल ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक महत्वाकांक्षी “100 डेज सीड बॉल्स अभियान” की शुरुआत की है।

5 जून से 12 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य संस्थान के चिकित्सकों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के एक व्यावहारिक और परिणामोन्मुख कार्यक्रम से जोड़ना है। अगले 100 दिनों में 30 हजार सीड बॉल्स तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या हैं सीड बॉल्स और क्यों बढ़ रही है उनकी लोकप्रियता?

सीड बॉल्स या बीज गेंदें मिट्टी, जैविक खाद और बीजों के मिश्रण से तैयार की जाती हैं। इनका उपयोग उन क्षेत्रों में पौधारोपण के लिए किया जाता है जहां पारंपरिक तरीके से पौधे लगाना कठिन होता है। वर्षा होने पर मिट्टी की यह गेंद धीरे-धीरे घुलती है और बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेने लगते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में भारत सहित दुनिया के कई देशों में सीड बॉल्स तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया गया है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जहां मानव हस्तक्षेप कम हो या जहां वन क्षेत्र का पुनर्जीवन आवश्यक हो, यह तकनीक अपेक्षाकृत कम लागत और अधिक प्रभावी विकल्प के रूप में उभरी है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य का गहरा संबंध

एम्स भोपाल द्वारा इस अभियान का संचालन स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है, जो इस बात का संकेत है कि संस्थान पर्यावरण संरक्षण को जनस्वास्थ्य से जोड़कर देख रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में वृक्षों की संख्या बढ़ने से केवल कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण ही नहीं होता, बल्कि वायु प्रदूषण कम करने, तापमान नियंत्रित रखने और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में भी सहायता मिलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हरित क्षेत्रों की उपलब्धता को स्वस्थ शहरी जीवन का महत्वपूर्ण घटक मानता है।

भोपाल जैसे तेजी से विस्तार करते शहरों में हरित आवरण का संरक्षण भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

30 हजार सीड बॉल्स का लक्ष्य कितना प्रभावी हो सकता है?

अभियान के तहत तैयार की जाने वाली सीड बॉल्स को भोपाल के आसपास के वन क्षेत्रों, पार्कों, सड़क किनारों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर फैलाया जाएगा। यदि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 30 हजार सीड बॉल्स तैयार होती हैं और इनमें से 50 से 80 प्रतिशत तक सफलतापूर्वक अंकुरित होती हैं, तो हजारों नए पौधों का विकास संभव हो सकता है।

हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि सफलता केवल बीज फैलाने पर निर्भर नहीं करती। मिट्टी की गुणवत्ता, वर्षा की मात्रा, स्थानीय प्रजातियों का चयन और पौधों के शुरुआती विकास की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए ऐसे अभियानों की वास्तविक सफलता का आकलन दीर्घकालिक निगरानी और वृक्षों के जीवित रहने की दर के आधार पर किया जाना चाहिए।

क्यों महत्वपूर्ण है संस्थागत भागीदारी?

भारत में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अधिकांश अभियान सरकारी या गैर-सरकारी संगठनों तक सीमित रहते हैं। ऐसे में किसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान का इस प्रकार का अभियान शुरू करना एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब डॉक्टर, शोधकर्ता, विद्यार्थी और स्वास्थ्यकर्मी स्वयं पर्यावरणीय गतिविधियों में भाग लेते हैं, तो समाज में इसका व्यापक संदेश जाता है। इससे पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देने में मदद मिलती है।

भविष्य की दिशा

‘100 डेज सीड बॉल्स अभियान’ केवल पौधों की संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामुदायिक भागीदारी से जोड़ने का एक मॉडल भी प्रस्तुत करता है। यदि इस पहल के परिणाम सकारात्मक रहते हैं, तो इसे प्रदेश के अन्य शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों में भी अपनाया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी चुनौतियों के बीच ऐसे अभियान यह संदेश देते हैं कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों और घोषणाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एम्स भोपाल की यह पहल इसी सामूहिक जिम्मेदारी की दिशा में एक सार्थक कदम के रूप में देखी जा रही है।

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