हाईकोर्ट के स्टे और राज्य सरकार की समिति पर सख्त टिप्पणी, अगली सुनवाई 15 सितंबर को
भोपाल/नई दिल्ली। भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण और नियम विरुद्ध भू-उपयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने भोपाल नगर निगम की ओर से पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) पर विचार करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर 5 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से बताया गया कि भोपाल में 1,000 से अधिक अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं और कार्रवाई के तहत 100 से अधिक भवनों को सील किया गया है। निगम का कहना था कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ से मिले स्थगन आदेश (स्टे) और राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के कारण आगे की कार्रवाई प्रभावित हुई।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले में हस्तक्षेप पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि अवैध निर्माण जैसे गंभीर मामलों में प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। साथ ही नगर निगम को तय समय में कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
रहवासियों ने फैसले का किया स्वागत
अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने सुप्रीम कोर्ट के रुख का स्वागत किया। उनका कहना है कि अवैध निर्माण के कारण क्षेत्र में यातायात, पार्किंग और नागरिक सुविधाओं की गंभीर समस्या पैदा हो गई है।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि अवैध इमारतों के कारण फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों पर भी अतिक्रमण हो गया है, जिससे आम लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
वहीं रहवासी लवनीश भाटी ने आरोप लगाया कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे अवैध निर्माण लगातार बढ़ते गए।
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति का गठन
अवैध निर्माण के खिलाफ चल रहे अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अरेरा कॉलोनी सहित गौतम नगर, कोलार रोड, नेहरू नगर, त्रिलंगा, रोहित नगर, रचना नगर, बावड़िया, साकेत नगर, भेल, कोटरा, लालघाटी, शक्ति नगर और शाहपुरा समेत कई क्षेत्रों के रहवासियों ने संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति, भोपाल का गठन किया है।
समिति ने मांग की है कि आवासीय भूखंडों पर नियमों के विपरीत चल रहे निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए और शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
