Bhopal में लिंग चयन और भ्रूण परीक्षण पर रोक से जुड़े कानूनों के पालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। जिला चिकित्सालय परिसर स्थित सीएचएचओ कार्यालय में आयोजित जिला सलाहकार समिति की बैठक में 41 अस्पतालों और सोनोग्राफी केंद्रों से जुड़े पंजीयन, नवीनीकरण और निरीक्षण मामलों की समीक्षा की गई।
बैठक का केंद्र बिंदु था PCPNDT Act यानी “प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स एक्ट”, जिसे देश में कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग परीक्षण रोकने के लिए लागू किया गया था।
क्यों अहम है यह बैठक?
मध्यप्रदेश सहित देश के कई राज्यों में वर्षों से गिरते लिंगानुपात ने सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। तकनीक के विस्तार के साथ सोनोग्राफी मशीनों की उपलब्धता बढ़ी, लेकिन इसके दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ी।
इसी कारण PCPNDT एक्ट के तहत सोनोग्राफी केंद्रों, रेडियोलॉजी क्लीनिकों और प्रसूति संस्थानों पर नियमित निगरानी अनिवार्य की गई है। भोपाल में आयोजित यह बैठक उसी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा थी, जहां नए पंजीयन, लाइसेंस नवीनीकरण और दस्तावेजों में संशोधन से जुड़े मामलों पर समिति ने विचार किया।
41 संस्थानों के मामलों की समीक्षा
बैठक में विभिन्न अस्पतालों और सोनोग्राफी केंद्रों के आवेदन प्रस्तुत किए गए। इनमें नए पंजीयन, लाइसेंस नवीनीकरण और एप्लिकेशन एडिट जैसे मामले शामिल थे। समिति ने निरीक्षण रिपोर्ट और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की।
बैठक की अध्यक्षता Dr. Manish Sharma ने की। इस दौरान Dr. Sanjay Jain, Dr. Shailesh Loonawat, Dr. Randhir Singh, जिला अभियोजन अधिकारी Rajendra Upadhyay और स्त्री रोग विशेषज्ञ Dr. Jyoti Khare सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
केवल लाइसेंस प्रक्रिया नहीं, कानूनी जवाबदेही भी
विशेषज्ञों के अनुसार PCPNDT एक्ट भारत के सबसे सख्त स्वास्थ्य कानूनों में से एक माना जाता है। इसके तहत रिकॉर्ड में गड़बड़ी, अनिवार्य फॉर्म न भरना या लिंग परीक्षण से जुड़े किसी भी संकेत पर केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
कई मामलों में सिर्फ तकनीकी त्रुटियां भी क्लीनिकों के लाइसेंस निलंबन का कारण बनी हैं। यही वजह है कि अब स्वास्थ्य विभाग केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि दस्तावेजों की डिजिटल ट्रैकिंग और नियमित ऑडिट पर भी जोर दिया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में लिंगानुपात अब भी चिंता का विषय
हालांकि शहरी क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सामाजिक मानसिकता में बदलाव की रफ्तार अभी पर्याप्त नहीं है। बेटियों को लेकर भेदभाव, छोटे परिवार की प्रवृत्ति और सामाजिक दबाव कई बार अवैध लिंग परीक्षण को बढ़ावा देते हैं।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि PCPNDT एक्ट का प्रभाव तभी मजबूत होगा जब कानूनी कार्रवाई के साथ सामाजिक जागरूकता अभियान भी लगातार चलें।
आने वाले समय में बढ़ सकती है डिजिटल निगरानी
स्वास्थ्य प्रशासन अब सोनोग्राफी मशीनों की ट्रैकिंग, ऑनलाइन रिकॉर्ड मॉनिटरिंग और निरीक्षण प्रणाली को अधिक मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा मॉनिटरिंग और डिजिटल ऑडिटिंग से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान अधिक तेजी से हो सकेगी।
भोपाल में हुई यह बैठक संकेत देती है कि स्वास्थ्य विभाग अब केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि कानून के अनुपालन को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी में है।
भोपाल में पीसीपीएनडीटी एक्ट पर सख्ती: 41 सोनोग्राफी केंद्रों और अस्पतालों की जांच-पड़ताल के बीच जिला सलाहकार समिति की अहम बैठक
