कैटरिंग वेंडर्स पर पीएफ–ईएसआई न देने, श्रम नियमों की अनदेखी और गुणवत्ता मानकों से समझौते का आरोप
भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान वीआईटी (VIT) परिसर में उपलब्ध कराई जा रही खाद्य सेवाओं को लेकर छात्रों के बीच गहरा असंतोष उभरकर सामने आया है। छात्रों की लगातार शिकायतों के बाद हाल ही में खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) द्वारा कैंपस कैंटीनों और कैटरिंग सेवाओं का ऑडिट भी किया गया था। अब नई जानकारी के अनुसार, कैंपस में कार्यरत कई कैटरिंग वेंडर्स पर गंभीर श्रम-कानून उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं।
पीएफ और ईएसआई जैसे वैधानिक लाभों से वंचित कर्मचारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संस्थान में कार्यरत कई कैटरिंग ठेकेदार श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। आरोप है कि कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) जैसे अनिवार्य वैधानिक लाभ नहीं दिए जा रहे हैं।
मौजूदा श्रम नियमों के तहत यह लाभ प्रत्येक योग्य कर्मचारी को प्रदान किया जाना अनिवार्य है, लेकिन कई कैटरर्स कथित तौर पर इन दायित्वों से बचते नजर आ रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति न केवल श्रमिकों के अधिकारों का हनन है, बल्कि इससे कैंपस की खाद्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
पे-रोल व्यवस्था से बचने की कोशिश
सामान्यतः बड़े शैक्षणिक संस्थानों में कैटरिंग कंपनियां अपने कर्मचारियों को नियमित पे-रोल पर रखती हैं, ताकि कर्मचारियों का उचित प्रशिक्षण हो सके, स्वच्छता एवं सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो, सेवाओं में निरंतरता बनी रहे
लेकिन वीआईटी कैंपस के कुछ वेंडर्स पर आरोप है कि वे कर्मचारियों को अनुबंध या अस्थायी आधार पर रखकर श्रम लागत कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे उन्हें पीएफ–ईएसआई जैसे दायित्वों से बचने और अधिक मुनाफा कमाने का अवसर मिल जाता है।
अनुबंध श्रम व्यवस्था से बढ़ रही समस्याएं
नए श्रम संहिता (लेबर कोड) के तहत दीर्घकालिक अनुबंध श्रम के उपयोग पर कड़े प्रावधान लागू हैं। इसके बावजूद कैंपस में कई कैटरर्स द्वारा अस्थायी और अनुबंध आधारित कर्मचारियों से काम कराया जा रहा है।
इस व्यवस्था के कारण कर्मचारियों का बार-बार बदलना, अपर्याप्त प्रशिक्षण, अधिक कार्य घंटे, सीमित निगरानी, स्वच्छता मानकों में लापरवाही, जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इसका सीधा असर छात्रों को मिलने वाली खाद्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि जब कर्मचारियों को उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थायी रोजगार नहीं मिलता, तो उनका कार्य-प्रदर्शन भी प्रभावित होता है। कमजोर रोजगार व्यवस्था के कारण स्वच्छता मानकों का पालन कमजोर पड़ता है, खाद्य सुरक्षा प्रोटोकॉल प्रभावित होते हैं, सेवा की निरंतरता बाधित होती है, कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता है
इन परिस्थितियों में बड़ी संख्या में छात्र समुदाय को दी जा रही खाद्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
‘ड्यू डिलिजेंस’ पर उठे सवाल
यह भी आरोप लग रहे हैं कि कैटरिंग अनुबंधों के आवंटन और नवीनीकरण के दौरान उचित जांच–पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) नहीं की जा रही है। कई वेंडर्स कथित तौर पर बिना श्रम कानूनों का पालन किए लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं, जो संस्थागत निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है।
कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष
कानूनी लाभों के अभाव, कम वेतन और असुरक्षित कार्य वातावरण के चलते कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
उच्च कर्मचारी पलायन दर और कमजोर जवाबदेही ढांचा अंततः छात्रों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है।
“शिकायत मिली तो होगी कार्रवाई” – लेबर विभाग
इस पूरे मामले में जब लेबर इंस्पेक्टर भोपाल, श्री हरदीप सेनी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह मामला फिलहाल हमारी जानकारी में नहीं है। यदि इस संबंध में कोई लिखित शिकायत प्राप्त होती है, तो नियमानुसार जांच कर उचित कार्यवाही की जाएगी।
निष्कर्ष
वीआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में खाद्य सेवाओं से जुड़ी यह स्थिति न केवल छात्रों के स्वास्थ्य और सुविधा से जुड़ा गंभीर विषय है, बल्कि श्रमिक अधिकारों के हनन का भी बड़ा उदाहरण है।
छात्रों और कर्मचारियों दोनों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है कि कैटरिंग वेंडर्स पर सख्त निगरानी रखी जाए, श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराया जाए, नियमित ऑडिट और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए। अब देखना होगा कि संस्थान प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाते हैं।
