रविन्द्र भवन के पास कचरे का अंबार, बारिश में नाले में पहुंचने का खतरा; जलभराव और प्रदूषण की बढ़ी आशंका

भोपाल, 7 जून। मानसून की शुरुआत के साथ राजधानी भोपाल में स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। शहर के प्रमुख प्रशासनिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में स्थित रविन्द्र भवन के समीप एक खाली मैदान में बड़ी मात्रा में कचरा जमा होने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस कचरे का निस्तारण नहीं किया गया तो बारिश के दौरान यह बहकर बाणगंगा नाले में पहुंच सकता है, जिससे न केवल नाले की जल निकासी क्षमता प्रभावित होगी बल्कि जलभराव और प्रदूषण की समस्या भी गंभीर रूप ले सकती है।
वीआईपी क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल
रविन्द्र भवन के आसपास का इलाका शहर के महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्रों में गिना जाता है। यह क्षेत्र वार्ड क्रमांक 24 और जोन क्रमांक 21 के अंतर्गत आता है। यहां राज्य शासन के कई विभागों के कार्यालय, सांस्कृतिक संस्थान तथा जनप्रतिनिधियों के आवास स्थित हैं। इसके बावजूद खुले मैदान में कचरे के ढेर दिखाई देना नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र का ठोस कचरा नियमित रूप से इसी खाली मैदान में डंप किया जा रहा है, जिसके कारण आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। मैदान में प्लास्टिक, घरेलू अपशिष्ट और अन्य कचरा बिखरा हुआ देखा जा सकता है।
बारिश में बढ़ सकती है बाणगंगा नाले की समस्या
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय समाजसेवी उमाशंकर तिवारी का कहना है कि रविन्द्र भवन और बाणगंगा नाले के आसपास जमा कचरा आगामी बारिश में बड़ी समस्या बन सकता है। उनके अनुसार तेज बारिश और आंधी के दौरान यह कचरा बहकर सीधे नाले में पहुंच सकता है, जिससे नाले में अवरोध उत्पन्न होंगे और जल निकासी प्रभावित होगी।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नालों में प्लास्टिक और ठोस कचरा जमा होने से पानी का प्रवाह रुकता है, जिसके परिणामस्वरूप शहरी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनती है। हर वर्ष मानसून के दौरान कई इलाकों में इसी कारण जल निकासी की समस्या सामने आती है।
प्रशासनिक संस्थानों के बीच बढ़ती गंदगी
रविन्द्र भवन क्षेत्र के आसपास विभिन्न शासकीय कार्यालय, सांस्कृतिक संस्थान और आवासीय कॉलोनियां स्थित हैं। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और नागरिक गुजरते हैं। समाजसेवियों का कहना है कि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति न केवल शहर की स्वच्छता छवि को प्रभावित करती है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय है।
कचरे के खुले ढेर से दुर्गंध, मच्छरों और अन्य कीटों के पनपने की आशंका भी बढ़ जाती है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
नगर निगम से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने नगर निगम से तत्काल कचरा हटाने, क्षेत्र की नियमित सफाई सुनिश्चित करने तथा बारिश से पहले बाणगंगा नाले की विशेष सफाई कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आगामी मानसून में यह समस्या व्यापक रूप ले सकती है।
जानकारी के अनुसार मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए संबंधित जोन के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
मानसून से पहले जरूरी है सतर्कता
शहरी नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार मानसून पूर्व सफाई अभियान केवल सड़कों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नालों, खाली भूखंडों और कचरा डंपिंग स्थलों की भी नियमित निगरानी आवश्यक है। रविन्द्र भवन के पास कचरे का यह ढेर इस बात का संकेत है कि स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर अभी भी कई क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है।



