भोपाल नगर निगम के जल संरक्षण अभियान पर उठे सवाल, जमीनी हकीकत चिंताजनक
भोपाल, 14 मई। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जल संरक्षण और भूजल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” की शुरुआत होते ही नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। नगर निगम भोपाल द्वारा 11 मई से शहर के कुओं, बावड़ियों और तालाबों की सफाई अभियान शुरू किया गया, लेकिन जोन-8 के नेहरू नगर स्थित कुए की स्थिति ने अभियान की वास्तविकता उजागर कर दी है। सफाई कार्य पूरा होने के दावों के बावजूद कुए के अंदर और बाहर गंदगी का अंबार दिखाई दिया।
नेहरू नगर में नवग्रह मंदिर के पास स्थित इस कुए की सफाई सोमवार और मंगलवार को किए जाने की बात नगर निगम अधिकारियों द्वारा कही गई थी। गुरुवार को मौके पर पहुंचकर जब स्थिति का जायजा लिया गया तो पाया गया कि कुए के चारों ओर कचरा फैला हुआ है। इतना ही नहीं, कुए की दीवार पर एक चाट विक्रेता द्वारा अतिक्रमण कर शेड बना लिया गया है, जिससे साफ नजर आता है कि निगम प्रशासन ने स्थायी व्यवस्थाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
कुए के अंदर की हालत बेहद खराब
स्थानीय लोगों के अनुसार कुए की सफाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। कुए के अंदर लगभग 20 फीट नीचे पानी भरा हुआ है, लेकिन उसके ऊपर मोटी परत में गंदगी और कीचड़ जमा है। पानी इतना दूषित दिखाई दे रहा है कि उसका उपयोग सामान्य कार्यों के लिए भी नहीं किया जा सकता। देखने में पानी से ज्यादा कीचड़ नजर आ रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि कुए में पानी सप्लाई के लिए मोटर भी लगी हुई है और वह चालू हालत में है। यदि कुए की सही तरीके से सफाई और संरक्षण किया जाए तो यह क्षेत्र में जल आपूर्ति का उपयोगी स्रोत बन सकता है। लेकिन मौजूदा हालात नगर निगम की लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर संकेत कर रहे हैं।
37 लाख रुपए होंगे खर्च, फिर भी सफाई पर सवाल
नगर निगम भोपाल द्वारा शहर के 8 तालाब, 18 बावड़ियों और 53 कुओं की सफाई, गहरीकरण और मरम्मत के लिए लगभग 37 लाख रुपए खर्च किए जाने हैं। अभियान का उद्देश्य भूजल स्तर को बढ़ाना और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना बताया गया है। लेकिन नेहरू नगर के कुए की स्थिति देखकर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर करोड़ों के जल संरक्षण अभियानों का वास्तविक लाभ जमीन पर क्यों नहीं दिखाई देता।
जल स्तर बढ़ाने का दावा, लेकिन जमीनी तैयारी अधूरी
देशभर में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान का मुख्य उद्देश्य लगातार गिरते भूजल स्तर को रोकना है। इसके तहत पुराने कुओं, बावड़ियों और तालाबों की सफाई कर उन्हें पुनर्जीवित करने की योजना बनाई गई है, ताकि वर्षा जल का संरक्षण हो सके और भूमिगत जल स्तर में सुधार आए। लेकिन यदि सफाई केवल कागजों तक सीमित रहेगी तो अभियान का उद्देश्य अधूरा ही रह जाएगा।
अधिकारी बोले – “अभी अभियान की शुरुआत है”
जोन-8 के जलकार्य विभाग के सब इंजीनियर गौरव परमार ने दावा किया कि कुए की सफाई पूरी हो चुकी है और अब दूसरे कुए की तैयारी की जा रही है। हालांकि मौके पर न तो कोई सुपरवाइजर मौजूद मिला और न ही सफाई व्यवस्था दिखाई दी।
वहीं नगर निगम भोपाल के प्रभारी जलकार्य उदित गर्ग ने कहा कि “अभी अभियान की शुरुआत है। अगर कहीं सफाई अधूरी है तो आगे चलकर उसे पूरा कर लिया जाएगा। अभियान अभी लंबे समय तक चलेगा।”
हालांकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शुरुआत ही इस तरह की लापरवाही और खानापूर्ति से होगी, तो जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियान पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
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