2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर साधे जाएंगे क्षेत्रीय और जातीय समीकरण
भोपाल। Mohan Yadav के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार में करीब ढाई साल बाद मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि जून 2026 या मानसून सत्र से पहले राज्य मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव किया जा सकता है। माना जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच लंबे समय से चल रहे मंथन के बाद अब खाली मंत्री पदों को भरा जाएगा और कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी परिवर्तन संभव है।
वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल 32 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य में अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस हिसाब से अभी चार मंत्री पद खाली हैं। सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व आगामी राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए इन पदों पर नए चेहरों को मौका दे सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2028 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरण मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसी कारण मंत्रिमंडल विस्तार में मालवा, बुंदेलखंड, महाकौशल, विंध्य और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। इसके अलावा ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के नेताओं को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार के प्रदर्शन और जनसंपर्क के आधार पर कुछ मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। वहीं संगठन में सक्रिय विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर सरकार को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाने की तैयारी चल रही है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है और भोपाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक बैठकों का दौर तेज होने की संभावना है।
मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत, जून या मानसून सत्र से पहले हो सकता है बड़ा फेरबदल
