लोकसभा में उठा सीए को कानूनी संरक्षण देने का मुद्दा, सांसद आलोक शर्मा ने की स्पष्ट कानून की मांग

भोपाल, 12 अगस्त । भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने लोकसभा में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) को क्लाइंट विवादों के चलते होने वाले कथित अनावश्यक पुलिस उत्पीड़न से बचाने के लिए प्रभावी कानूनी संरक्षण देने की मांग की। उन्होंने बुधवार को नियम 377 के तहत यह मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से सीए के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था और जांच प्रक्रिया निर्धारित करने का आग्रह किया।

क्लाइंट के विवाद में सीए को परेशान न किया जाए

सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट देश की अर्थव्यवस्था, कर व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन और वित्तीय पारदर्शिता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई बार क्लाइंट और सीए के बीच विवाद होने पर सीए की प्रत्यक्ष भूमिका या गलती नहीं होने के बावजूद उन्हें पुलिस जांच का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में सीए को थाने बुलाकर घंटों बैठाने या मानसिक दबाव बनाने की शिकायतें सामने आती हैं। सीए आमतौर पर क्लाइंट द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और सूचनाओं के आधार पर पेशेवर सेवाएं देते हैं। ऐसे में क्लाइंट द्वारा गलत जानकारी या दस्तावेज दिए जाने की स्थिति में बिना निष्पक्ष जांच के सीए को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

कार्रवाई से पहले हो निष्पक्ष जांच

सांसद ने मांग की कि किसी सीए के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसकी वास्तविक भूमिका, जानकारी और जिम्मेदारी की निष्पक्ष जांच की जाए। पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं, ताकि केवल पेशेवर संबंध या क्लाइंट विवाद के आधार पर सीए को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।

उन्होंने कहा कि जांच में सहयोग करने वाले सीए से पूछताछ सम्मानजनक तरीके और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जानी चाहिए। निर्दोष पेशेवरों को अनावश्यक मानसिक और पेशेवर उत्पीड़न से बचाने के लिए प्रभावी कानूनी संरक्षण जरूरी है।

दोनों सदनों में उठ चुकी है मांग

लोकसभा में यह विषय 12 अगस्त 2026 को नियम 377 के अंतर्गत सूचीबद्ध मामलों में तीसरे क्रम पर था। इससे पहले राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा भी सीए के लिए संरक्षण कानून की आवश्यकता का मुद्दा राज्यसभा में उठा चुके हैं।

सांसद आलोक शर्मा ने केंद्र सरकार से सीए के पेशेवर दायित्वों को ध्यान में रखते हुए कानूनी संरक्षण, निर्धारित जांच प्रक्रिया और पुलिस-प्रशासन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की, ताकि वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई हो और निर्दोष पेशेवरों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।

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