Report : शैलेश सिंह कुशवाह, ग्वालियर
ग्वालियर। ग्वालियर अंचल में पहाड़ियों के कथित अवैध कटाव, अतिक्रमण और खनन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई इलाकों में पहाड़ियों को काटकर समतल किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचने के साथ ही वन और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की आशंका भी जताई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक शीतला माता क्षेत्र समेत कई स्थानों पर पहाड़ियों को बड़े पैमाने पर काटे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि लंबे समय से चल रही इन गतिविधियों के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों ने वन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
पहाड़ियां नष्ट होने से पर्यावरण पर असर
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ियां केवल पत्थरों और मिट्टी का हिस्सा नहीं होतीं। ये भूजल संरक्षण, वर्षाजल के प्रवाह, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पहाड़ियों के लगातार कटाव से प्राकृतिक जल संरचनाओं और आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्राकृतिक पहाड़ियों को इसी तरह काटकर समतल किया जाता रहा तो आने वाले समय में क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान को बड़ा नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि एक बार नष्ट हो चुकी प्राकृतिक पहाड़ी को दोबारा उसी स्वरूप में तैयार करना संभव नहीं है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
नागरिकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित अवैध अतिक्रमण और खनन की गतिविधियों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।
लोगों ने प्रशासन से यह भी अपील की है कि संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वे कराया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किन स्थानों पर वैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं और कहां नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी जरूरी है। पहाड़ियां हजारों वर्षों में बनती हैं, लेकिन उन्हें नष्ट होने में कुछ ही समय लगता है। इसलिए समय रहते प्रभावी निगरानी और कार्रवाई जरूरी है।http://ग्वालियर अंचल में जमींदोज हो रहीं पहाड़ियां, अवैध खनन और अतिक्रमण पर उठे सवाल
